माँ तुम जादूगर हो…

मन ही मन कहता रहा माँ तुम जादूगर हो ना जाने कहाँ से लाती हो इतनी हिम्मत | माँ सचमें तुम से बहुत प्यार है बहुत ज़्यादा |

मुखर्जी नगर- सपनों का नगर

मुखर्जी नगर, दिल्ली में स्थित है, जो कि लोक प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी हेतु प्रसिद्ध है।

बदलते बारिश के मायने..

बचपन से युवावस्था और बच्ची से विवाहिता बन जाने के मध्य ..आये छोटे छोटे मनोभावों का वर्णन

पापा

​पहले ही क्षमा के साथ ये बात बता दूँ की कुछ महीनों तक जब मेरे सामने उन मनहूस दिनो की कोई पोस्ट आएगी तो मैं पापा पर ना चाहते हुए भी लिखने पर मजबूर हो जाऊँगा । क्या करूँ खुद से अपना हाल कह कह कर थक गया हूँ इसीलिए यहाँ लिखने पर मजबूर हो जाता हूँ ।

​ना जाने क्यों ?

सुख और दुःख तो एक सिक्के के दो पहलुओं के समान हैं इनका आना जाना तो जीवन में लगा रहता है मगर जब खुशियाँ एक दम से एक ही दिन में किसी से एकदम किनारा कर लें तब इंसान अपने उस दुःख और दर्द को बयान करने की हालत में भी नही रहता ।

पक्की सड़क(कहानी)

कई लोगों ने कहा_"मास्टरजी आप भी क्यों इतना शारीरिक कष्ट करते हैं, मोटरसाईकिल ख़रीद लीजिये। ख़ाली हाज़िरी ही तो लेनी होती है, मोटरसाईकिल ले लीजियेगा तो और जल्दी लौट आइयेगा, समय बर्बाद नहीं होगा।

नज़्म

प्रेम में भी एक तन्हाई है पीड़ा है जो इससे सहन कर लेता है और प्रेम को पा लेता है वो ही सत्यार्थ प्रेम का हकदार है।।

WHERE DOES AKRAM MALIK STAY?

Stories reflecting today's times of fear, mistrust and love

अंतर्द्वंद

मनोस्तिथि सामाजिक पीड़ा से ग्रसित जिसमे समावेशन है कुंठा और निराशा और भावुकता का

एक मुलाकात

महानगरों के जीवन का अनछुआ पहलु । एक काला सच

रीयूनियन

बचपन के चार दोस्त । पंद्रह साल बाद “रीयूनियन” का प्लान ।

एक स्नेह यह भी.... ----

स्मृतियाँ कितनी विचित्र होती हैं.न चाहते हुए भी साथ नहीं छोड़ती . और अगर चाहो तो याद नहीं आती. अच्छी स्मृतियाँ तो यूँ धूमिल हो भी सकती हैं, पर कुछ दु:खद और कडूआहट भरी अथवा जटिल-सी स्मृतियाँ तो इंसान पूरी जिन्दगी ढोता रहता है, और वह बस निर्लज्जता से जुड़ी रहती हैं, हमारे साथ, हर समय. 

बात भले कल की हो वास्ता आज से ही है…

वर्ना तुम्हारा ये ख़ामोश रहना आने वाली नस्ल को पूरी तरह कर बर्बाद देगा

“पिता से पहले पिता के बाद”

डेढ महीने हस्पतालों चक्कर काटे थे उन भाईयों ने अपने पिता को लेकर । वो पिता जिसका घूरना ही काफी होता था इन बेटों के मन में वो डर पैदा करने के लिए जो एक बाप को लेकर हर बेटे में होता है उस बाप को थप्पड़ तक मारे थे इन बेटों ने ।

So let me show you the real me!!

I usually meet people who judge others without knowing them.. So to know the reason behind doing so,I googled it. And read few reasons.. People have their own past experiences. People have ego clashes. Revengeful mind. Signs of Jealousy. Or they may be 'perfect' (sounds weird)

मरने के बाद सम्मान

​मरने के बाद सम्मान होगा मेरे शब्दों को तवज्जो तब मिलेगी

कौन हो तुम?

जवाब एक स्त्री का समाज के उन लोगों को जो बस उसे दबाना चाहते हैं।

| बधिर भगवान | Advit Tiple |

Poem on recent issue arose by tweet of Mr. Sonu Nigam

वक्त

एक एक कर के उन दिनों की सारी यादें आखों के सामने थीं जब ज़िंदगी ने अभिनव से सब कुछ छीन कर बदले में मौत तक भी नही दी थी | पिता की अचानक से कार एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई | और उनके कर्ज़ में फैक्टरी ज़मीन सब बिक गई पास बचे तो कुछ पैसे और एक मां जो पल पल मौत से लड़ रही थी

ECHOES

It is a love story that was not permitted to flourish by the legions of different religions.

राजनीति के Romeo

It is a view of aam aadmi, facing the issues in UP

जान

इंटरव्यू के अंतिम चरण में चयन न होने पर हताश और क्रुद्ध आशुतोष कमरे पर पहुंचते ही पत्नी पर बरस पड़ा।

"बस... उस पल का तुम इंतजार करना"

ये मेरे जीवन की पहली स्वरचित कविता है जिसे मैंने एक संदेशात्मक रूप में लिखा है या यूँ कहें कि ये मेरा पहला प्रेम पत्र है जिसे मैंने उस लड़की के लिए लिखा है जिससे मैं बेइंतेहा मोहब्बत करता हूँ

​खेल नियती का

बात तकरीबन साठ साल पुरानी होगी भारत को आज़ाद हुए महज़ कुछ साल ही हुए थे, अर्थव्यवस्था पूरी तरह से अपाहिज थी जिस कारण बेरोज़गारी अपने चरम पर थी