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@dawriter

"बस... उस पल का तुम इंतजार करना"

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ankitg by  
ankitg

 

 

"बस... उस पल का तुम इंतजार करना"

 

तुम्हारा यूं हंसकर मुस्कुराना,

यूं मिलकर खिलखिलाना,

तुम्हें पीछे मुड़कर बार बार देखना,

मुझे अच्छा लगता है।

 

क्लास में छुप छुप कर तुम्हें घूरना,

 तुम्हारे देखने पर अपनी आँखें झुका लेना,

मुझे अच्छा लगता है।

 

तुम्हारी इन आँखों में ना जाने क्या बात है,

जब भी इन्हें सोचता हूँ बस... इनमें ही खो जाता हूँ।

 

तुम हमेशा साथ रहो ये ख्य़ाल मन को भाता है,

तुमसे बात करने को मन सुबह से ही तऱस जाता है।

 

जब तक शाम होती है, मैं उदास हो जाता हूँ,

रात्रि में तुमसे बात करके मैं अपना अकेलापन भूल जाता हूँ।

 

जिंदगी में बस... एक ही कस़क ब़ाकी है,

इतने पास होकर भी एक दूरी ब़ाकी है।

 ना जाने मैं तुमसे कब मिल पाऊँगा,

उसी पहर का इंतज़ार ब़ाकी है।

 

मेरा ब़स... तुमसे है सिर्फ इतना ही कहना,

मैं हर पल तुम्हें याद करता हूँ,

तुम भी मुझे याद रख़ना,

जीव़न की इस कश्मकश में कहीं भूल ना जाना ।

यूं तो हमें है किसी ना किसी मोड़ पर मिलना,

बस... तुम अपनी जिंद़गी की राह सीधी ना रख़ना ।

 

और अंत में मुझे है ब़स... इतना ही कहना,

कि तुम जैसी हो वैसी ही रहना,

अपने आप मैं कभी परिवर्तन ना करना,

एक दिन मैं आऊँगा मैं तुम्हें लेने,

ब़स... उस प़ल का तुम इंतज़ार करना ।



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