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@dawriter

| बधिर भगवान | Advit Tiple |

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जी हाँ, हमारे भगवान आजकल कुछ कम सुन रहे है,

यह मैं नही पूरी दुनियावाले कह रहे है,

अगर मिल जाये भगवान तो उनको डॉक्टर के पास ले जाऊ,
क्योंकि कम सुने भगवान और परेशान पूरे देशवासी हो रहे हैं...
जी हाँ, हमारे भगवान आजकल कुछ कम सुन रहे है...।

आजकल भगवान जागते और सोते भी बड़ी आवाज़ के बिच हैं,
सच कहूँ तो, यह समझने वाले अपने आप में नीच है,
क्या थे भगवान और क्या बन के रह गए है,
अजी मन की बात सुनने वाले भगवान भी
आज अपने ही कान टटोल रहे है।।
जी हाँ, हमारे भगवान आजकल कुछ कम सुन रहे है....।

दरसल इसे भक्ति नही ध्वनि प्रदूषण कहते है,
और इस ध्वनि प्रदूषण के बीच न जाने कितने ही मरीज, बुजुर्ग और विद्यार्थी भी रहते है,
सब मानेंगे की गलतिया तो हो रही है हम सब से,
लेकिन न जाने क्या सिर्फ "धर्म के रक्षक" ही भगवान का नाम लेकर अपनी छाती कूट रहे है..
जी हाँ, हमारे भगवान आजकल कुछ कम सुन रहे है...।

मसला प्रदूषण का हो तो प्रदूषण की तरह ही लीजिए,
हो सके तो शादी, दीवाली, मंदिर, मशीद से थोड़ी-थोड़ी आवाजे कम कीजिये,
यक़ीन तो है हम सबको की भगवान मन भी सुन लेते हैं
फिर क्यों हमारी भक्ति बड़ी आवाज़ो से गिन रहे हैं?

क्या सच में हमारे भगवान आजकल कम सुन रहे हैं?



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