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@dawriter

🌴 प्रकृति ने घोले रंग 🌴

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sunilakash by  
sunilakash

 

प्रकृति ने रंग घोल दिये हैं हल्के-गहरे प्यारे-प्यारे।
मन को बहुत भले लगते हैं दृश्य सलोने न्यारे-न्यारे।
सिंदूरी किरणे अम्बर में सुबह को मोहक लगती हैं।
उषा की लाली से जग में सारी आशाएं जगती हैं॥
नीली झील में ठहरा जल स्वयं ही स्पंदित होता है।
क्षितिज पे उड़ता आँचल-सा किसका मन हुलसित होता है ॥
जग के जगने से पूर्व खोलती प्रभा नयन कारे-कजरारे।
मन को बहुत भले लगते हैं दृश्य सलोने न्यारे-न्यारे॥1॥

 


चिड़ियों की चहकाहट के संग चट-चट खिल जाती हैं कलियाँ ।
उन पर भंवरे आकर के फिर करने लगते हैं रंगरलियां॥
कोसों तक महकी हवा सभी के प्राणों को सुरभित करती है।
नव उत्साह जगा फूलों में नया रूप दर्शित करती है॥
अहा ! चित्रकार ने किस शैली में मिश्रित कर डाले रंग सारे॥
मन को बहुत भले लगते हैं दृश्य सलोने न्यारे-न्यारे।2॥
प्रकृति ने रंग घोल दिये हैं हल्के-गहरे प्यारे-प्यारे ॥



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