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@dawriter

जिन्दगी का सत्य....... पापा कहां चले गए

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rajmati777 by  
rajmati777

पापा एक दम से यूं अचानक हमारे बीच से जुदा हो जायेंगे कभी नहीं सोचा था। पापा को तो कुछ भी नहीं हुआ था, अच्छे ही थे, बस बात करते करते ही........ क्या हुआ....... और.......हम तो निस्तब्ध से हो गये।

पापा का यूं चला जाना हमारे लिए असहनीय हो गया था। मां तो गुमसुम सी बैठी रहती। कुछ नहीं बोलती। लोगों का घर में जमावड़ा लगा रहता, पर मां....न जाने... कहां खोई रहती।इन सात दिनों में हमें जिंदगी के बारे कटु अनुभव हो गये ।

कौन अपना है कौन पराया है,सारे रिश्ते नाते की सच्चाई सामने आने लगी।लोग आते सांत्वना दे कर चले जाते। कुछ काम हो तो बोलना......पर कोई काम करें,सहायता करने वाला नहीं मिलता।सब मात्र दिखावा,बस एक फोरमेलिटी तक।

मां सारे दिन दरवाजे पर ही नजर लगाए रखती। शायद पापा का इंतजार था......पर बस इंतजार.....सच्चाई से बहुत दूर।

मां के दिल की व्यथा को हमारा मन कब समझ पा रहा था। वो भी हमारे सामने चुपचाप रहती, कोई आंसू नहीं बहाती। पर रात को जब हम सब सो जाते तो कितने अश्क दर्द में बहाती। और हम चुपके से चादर ओढ़ कर सोने का नाटक करते और मां के इस दर्द को झीनी झीनी चादर में से अनुभव करते।

पापा तो हमारे आदर्श थे और कितना प्यार करते। और वो बचपन का हादसा कहें या घटना....जब मैंने पहली बार डेड बॉडी देखी तो पापा से पूछा कि क्या है ये। पापा कुछ नहीं बोले ....बस मुझे देखते रहे,बेटा यही जीवन की सच्चाई है.... मैं समझ गई थी पापा की बात।उस रात मैं सो नही पाई, पूरी रात और पापा का हाथ पकड़ कर पूरी रात करवटें बदलते हुए निकाली।

खुदा वाह रे तेरा दस्तूर। जीवन की अंतिम सच्चाई.....।मन कितना दुःखी होता।

पापा आप भी तो हमसे बेपनाह मोहब्बत करते थे, और हममें वो सारे संस्कार कूट कूट कर भरें।.....मान ली हमने जीवन की सच्चाई..... अब नहीं रोयेंगे,न मा को रोने देंगे।

और पापा आप सुबह होती कमरे में आकर हमसे क्या बोलते थे...... याद है हमें.....हम उसे अपनायेंगे।....

सुबह नींद में से उठाने के लिए आप जो गीत गुनगुना करके हमें उठाते थे....."उठ जाग मुसाफिर भोर भयी अब रैन कहा जो सोवत है जो सोवत है वो खोवत है जो जागत है वो पावत है"।

जीवन हमें जीना है आप के अंदर्शो के साथ। आप के द्वारा बताए गए जीवन के मार्ग पर चल कर आपके आदर्शों की बैल को महकाना है। और इस बगिया में फिर बहार लानी है और मा के मन में उत्साह उम्मीद उमंग भर नव ऊर्जा भर जीना है।

आप भी मेरे पापा के आदर्शों से सहमत हैं, तो अपने विचारों से मुझे अवश्य अवगत कराये और अपना आशीर्वाद प्रेषित करें।



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