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@dawriter

हल्ला-गुल्ला नहीं, मंथन की जरुरत

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harish999 by  
harish999

चलिए मान लेते है अगले आम चुनाव ईवीएम पर नहीं मतपत्र पर होंगे. लेकिन वर्तमान के विपक्षी दल अगला चुनाव भी हार गए तब क्या होगा. चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाने के बजाय अपने गिरेबान में झांकना बेहतर होगा. ये रोज-रोज की चिक-चिक बाजी से अच्छा है, विपक्षी दलों को मंथन करते हुए अपने आचरण में सुधर लाने की जरुरत है. सिर्फ हल्ला-गुल्ला मचाकर आप आयोग के सदस्यों को अपने प्रभाव में ले सकते है, पर करोड़ों मतदाताओं का क्या करोगे, जो चुनाव में ईमानदारी से वोट देकर भी स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे है. पहले मतपत्र, फिर ईवीएम और अब वीवीपैट लाकर भी क्या कर लोगे, जब जनता ने ही नकार दिया. अभी भी समय है, वक़्त गुजरते देर नहीं लगती. यूं भी आम जनता पहले से नेताओं से त्रस्त है, ऊपर से ये रोज-रोज का रोना-पीटना. अरे जिस काम के जनता ने चुना है, सिर्फ उसको करो ना. मतपत्र हो ईवीएम ये चुनाव आयोग देख लेगा, नहीं तो अगले चुनाव में जनता खुद ही फैसला कर देगी. दरअसल ईवीएम नहीं बल्कि ऊंगली उठाने वाले गलत है. नीयत का खोट कभी दूर हुआ है क्या. एक ओर करोड़ों वोटर दूसरी ओर बामुश्किल सैकडा पार. अराजकता फैलाने की भी हद होती है. न चैन से जिएगे, न जीने देगे. जो करना है करेंगें नही. अभी तक ईवीएम में टेंपरिंग की बात कर रहे सौरभ भारद्वाज ने चुनाव आयोग की सर्वदलीय बैठक में VVPAT से चुनाव कराने की बात की. वहीं बीएसपी बैलेट पेपर से चुनाव कराने के पक्ष में थी. दूसरी ओर, जेडीयू के केसी त्यागी ने कहा कि चुनाव आयोग विश्वास बहाल करे.



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