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@dawriter

वक्त

0 21       

एक एक कर के उन दिनों की सारी यादें आखों के सामने थीं जब ज़िंदगी ने अभिनव से सब कुछ छीन कर बदले में मौत तक भी नही दी थी | पिता की अचानक से कार एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई | और उनके कर्ज़ में फैक्टरी ज़मीन सब बिक गई पास बचे तो कुछ पैसे और एक मां जो पल पल मौत से लड़ रही थी | मगर मां अच्छी खिलाड़ी नही थी इस लिये ज़्यादा देर ज़िंदगी के खेल में टिक नही पाई और पिता के पीछे पीछे अपने मातृधर्म को छोड़ शायद पतिधर्म निभाया और कुछ दिनों बाद ही गुज़र गईं |

अभिनव के सारे सपने चूर चूर हो गये एम बी ए की पढ़ाई छोड़नी पड़ी | रोज़ नये नये बहानों से लड़ते हुये कनिका ने भी एक दिन साथ छोड़ दिया | शायद वो प्यार में पागल होने की बजाये समझदार थी इसी लिये अभिनव का अन्धेरे में खो चुका भविष्य देख कर उसने उसका साथ छोड़ उजाले कि तरफ जाना ही सही समझा | जाते हुये कह गई “तुम तो खुद टूट कर बिखर गये मुझे क्या संभालोगे प्यार करती हूं तुमसे मगर अंधी नही हूं जो तुम्हारे साथ कूऐं में कूूद जाऊं | मैने विरेन से शादी के लिये हां कह दी है | अब तुम्हारा दूर हो जाना ही सही है “|

अभिनव के लिये ये ज़्यादा चौंकाने वाली खबर नही थी जहा इतना कुछ गया वहां ये भी सही | वैसे भी अपने प्यार को एैसी ज़िंदगी देना कौन चाहेगा | बिना कुछ बोले अभिनव चला आया था कनिका सब चुप चाप देखती रही | ज़िंदगी के इस सबसे मुश्किल दौर में भी अभिनव टूटा मगर बिखरा नही | हिम्मत की और बस आगे बढ़ता रहा | अभिनव इन्ही ख्यालों में खोया था के दरवाजे पर विरेन ने दस्तक दी और पास आकर कहा “सर आपकी कार तैयार है | मिटिंग के लिये निकलना है सब इंतज़ार कर रहे होंगे |

अभिनव बिना कुछ बोले उठा और अपनी ऑफिस से निकल पड़ा | विरेन जिसके लिये कनिका ने अभिनव ठुकराया था वो अब विरेन के कई नौकरों में से एक खास नौकर था जिसे अभिनव ने कनिका के एक बार कहने पर बिना कुछ कहे अपनी एक कंपनी के मैनेजर की पोस्ट पर रख लिया था |
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वही अभिनव वही बाकी सारे बस फर्क इतना कल ये सब के पिछे था आज सब इसके पीछे | वक्त का क्या पता कब बदल जाये…
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धीरज झा…



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