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@dawriter

लुगाईपना

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बस में बैठते ही अक्सर सभी लोगों को नींद आने लगती है। मुझे भी ऐसा ही होता है। परन्तु नींद का झोंका लेते वक़्त डर लगा रहता है कि कहीं कोई पॉकेट न मार ले, या फिर कहीं खर्राटे न आने लगें – तब तो बहुत बुरा लगेगा। वैसे मुझे आज तक कभी किसी ने बस में खर्राटों के लिए टोका नहीं, यहाँ तक कि मेरी धर्मपत्नी ने भी नहीं, जो घर में खर्राटे लेने पर मेरी खाट खड़ी कर देती है।

ऐसे ही एक दिन बस में सफर करते वक़्त मैं नींद में था तभी पीछे की सीट से एक अज़ीब सा शब्द मेरे कानों में पड़ा – लुगाईपना। बड़ा ही अज़ीब था मेरे लिए क्योंकि वैसे भी हिंदी साहित्य का कोई ख़ास ज्ञान मुझे नहीं है। ‘लुगाईपना’ आम बोल-चाल का शब्द है या इसका हिंदी साहित्य से कोई सम्बन्ध है, ये भी मुझे पता नहीं। जब दूसरी-तीसरी बार ये शब्द मेरे पीछे दोहराता रहा तो कौतुहलवश मैंने पीछे मुड़कर देखा। एक बीस-इक्कीस साल की लड़की अपने मोबाइल पर किसी से बात कर रही थी। मैंने फिर से अपना चेहरा सामने की तरफ कर लिया। मगर लुगाईपना नामक शब्द ने मुझे उसकी बातें सुनने पर मजबूर कर दिया ताकि इस शब्द का कुछ पता चले कि आखिर इसका अर्थ क्या है। वैसे मैं जानता हूँ कि किसी की इस प्रकार से बातें सुनना अशिष्टता है, परन्तु लेखक होने के नाते आदत से मज़बूर हो जाता हूँ।

वह लड़की किसी को कह रही थी, “देख...मैं तुझे फिर समझा रही हूँ...तू लुगाईपना छोड़ दे।”

“----!!”

“तूने अंकिता से क्या कहा?”

“****”

“झूठ मत बोल, यही बात मैंने मोना से भी सुनी है!”

“>>>>”

“तुझे क्या मज़ा आता है ये सब करने में ?”

अभी तक मुझे इस शब्द का कोई अर्थ मालूम नहीं पड़ा था। मैं अपने सामान्य ज्ञान से अनुमान लगा रहा था कि गाँव में सामान्यता लुगाई शब्द पत्नी के लिए प्रयुक्त होता है जो कि एक औरत ही होती है और लुगाईपना का सीधा अर्थ 'औरत होना' ही हुआ।

तो क्या औरत होना कोई अपराध है ? और वो भी तब जब एक लड़की ख़ुद किसी को कह रही हो – “लुगाईपना छोड़ दे।” तब तो ये सोचने वाली बात है। नहीं, नहीं – एक लड़की अपने औरत होने की बेईज्ज़ती क्यों करेगी, इसका अर्थ कुछ और होगा। मुझे अभी उसकी कुछ और बातें सुननी चाहियें। और मैंने अपने कान फिर से उधर लगा दिए।

“देख सुन, मुझे इन सब बातों से कोई मतलब नहीं है। तुझे मेरे साथ लगना है – तो ये लुगाईपना छोड़ना पड़ेगा।”

“---!---“

“बकवास मत कर...गुस्सा तो मुझे बहुत आ रहा है...”

“??”

“तूने हमें वहां कैसी जगह भेज दिया ??”

“***?***”

“कैसी-कैसी सिगरेट और कैसी-कैसी शराब पिलाई उन लोगों ने हमें !!”

अब मुझे कुछ-कुछ स्पष्ट होने लगा था। वो शायद किसी पिंप से बात कर रही थी जिसे ठेठ भाषा में दल्ला कहा जाता है। फिर वो उसे ‘दल्लागिरी’ छोड़ने के लिए बोलती ‘लुगाईपना’ नहीं। इस शब्द का कोई और अर्थ है, अभी और सुनना चाहिए। पता नहीं क्यों, मैंने एक बार फिर पीछे मुड़कर देखा। मैंने देखा, उसके पास बैठा आदमी या तो सो रहा था, या फिर सोने का नाटक कर रहा था – मुझे क्या? लेकिन जिस व्यक्ति के पास ऐसा मज़ेदार, लच्छेदार गर्मागर्म वार्तालाप चल रहा हो, वह सो कैसे सकता है ? ज़रूर वो भी मेरी तरह ही उसकी बातों का आनंद ले रहा होगा और लुगाईपना नामक शब्द को जानने की या व्याख्या करने की कोशिश कर रहा होगा। देखा, कैसा मक्कार आदमी है ? सोने का नाटक कर दूसरों की बातें सुन रहा है – असभ्य कहीं का !

मगर, मैं भी तो वही कर रहा हूँ, फिर तो मैं भी असभ्य हुआ ! अब हुआ तो हुआ, मैं कुछ नहीं कर सकता, उस लड़की की बातें सुनने से मैं अपने को नहीं रोक सकता, जबकि वो लड़की भी बिना किसी की परवाह किये बेफिक्री से बात कर रही थी।

“देख, तेरा मेरा टांका ठीक चल रहा है, बस तू ये लुगाईपना छोड़ दे ...”

“% & !”

“अच्छा एक बात बता – तुझे इधर की उधर और उधर की इधर करके हम लड़कियों को लड़ाने में क्या मज़ा आता है ?”

“-------------“

“देख, तुझे अगर मेरे साथ रहना है, मेरे साथ रह, और उसके साथ रहना है तो उसके साथ रह, मगर ये इधर की उधर और उधर की इधर करके दूसरों को आपस में लड़वाने का लुगाईपना छोड़ दे।”

ओह ! अब मुझे समझ आ गया था –इधर की उधर और उधर की इधर यानि चुगली करने को वो लड़की लुगाईपना कह रही थी – शायद !
अगर किसी को इस शब्द का सही अर्थ पता हो तो कृपया मुझे भी बताएं।

मगर शब्द है बड़ा मज़ेदार, है ना ?

***

 



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