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@dawriter

मुझे विचार करने पर बाध्य करती है-एक अविष्मरनिय संकल्पना-

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2 जून को ऐसे ऐसे इंसान का जन्म हुआ जो जनता और देश के युवाओं के नजरो में उनका हीरो है,परन्तु यंहा की सरकार ने उसे आतंकवादी करार दे दिया,परन्तु देश की जनता ने उसे शहीद का दर्जा दिया,और देश के युवा ने इसे अपना क्रांतिकारी हीरो माना- मेरा भी अपना एक मत है-जिसे जाहिर करने का अधिकार मुझे मेरा सविधान देता है,यंहा के सामाजिक और राजनितिक गलियारों में अगर हड़कम्प मचाने का कार्य अगर किसी ने किया है तो मेरे नजरो में -जरनैल सिंह भीण्डरावाला वह महान क्रांतिकारी था-और सन्त था- जिनके पूर्वजो का इतिहास ही ये बताता है कि-उनका नेतृतब कितना दमदार और प्रखर और प्रबल था-

उनका कोई भी कायल होना लाजमी है- मैं भी एक आज का नौजवान युवक हु-जो गम्भीरता से विचार करता है- "क्या सच में अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए अगर हथियार उठाया जाए तो-क्या सच में ये दुनिया हमे-आतंकवादी करार देगी या फिर शस्त्रधारी उन्माद फैलाने वाला हिंसक प्रवृति का धनी जानकर तिरस्कार करेगी-" एक आगाज- यह संकल्पना भी मुझे विचार करने पर बाध्य करती है- क्रांतिकारी सन्त- जरनैल सिंह भिंडरावाला-



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