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@dawriter

बात भले कल की हो वास्ता आज से ही है…

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इस कत्लेआम का कौन जवाब देगा
अधकटी लाशों का कौन हिसाब देगा
अभी बंधे हैं तो ये हाल है
सोचो जिस दिन उतर आये भेड़िये सड़कों पर
फिर तो इज्ज़त का साथ ना घूँघट देगा ना हिज़ाब देगा
तुम मेरी बात को याद रखना
हमारा आज हमारे कल को
खून से सने इतिहास की किताब देगा
अब भी वक्त है संभल जाओ
वर्ना तुम्हारा ये ख़ामोश रहना
आने वाली नस्ल को पूरी तरह कर बर्बाद देगा

धीरज झा



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