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@dawriter

पुरस्कार

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स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्कूल में भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा था। मंत्री जी पहली बार मुख्य अतिथि के हैसियत से अपने ही स्कूल में उपस्थित थे। ज़बरदस्त भीड़ और कैमरा संभालते पत्रकारों के बीच प्रतियोगी बच्चे आंग्ल भाषा में अपने भाषण से दर्शकों को आनंदित कर रहे थे। जिन दर्शकों ने कभी आंग्ल भाषा का अ ब स भी नहीं जाना था, वह भी वाह वाह कर रहे थे।

 

तभी मंच पर एक साधारण शक्लो सूरत की एक लड़की "मुनियाँ" आयी," नमस्ते! अगर आप लोग अनुमति दें तो मैं अपना भाषण हिंदी में देना चाहती हूं।"

 

निर्णायक मण्डल के नो-नो की आवाज़ दर्शकों के हाँ हाँ, जरूर जरूर में दब सी गयी। उसने अपने भाषण ," भारत माता के वीर सपूतों,..... जय हिंद।" से सबका मन मोह लिया।

 

कुछ देर बाद जब निर्णायक मंडल ने पुरस्कार की घोषणा की तो सबके आशा के विपरीत मुनियाँ को तीसरा पुरस्कार मिला। वह चाहकर भी अपने आँसू रोक न सकी और उसके कदम खेल शिक्षक की ओर बढ़ चले।

 

"श्रीमानजी, ऐसा क्यों? सबसे ज्यादा ताली तो मेरे भी भाषण पर बजी थी। फिर क्या कमी रह गयी?

 

"तुमने भाषण भी हिंदी में दिया और तुम्हारा चेहरा भी फोटोजेनिक नहीं.. कहते हुये श्रीमानजी के शब्द लड़खड़ाने लगे।" " श्रीमानजी, यह फैशन शो तो नहीं था न? मुनियाँ सुबक रही थी।" "सारी मीडिया की नज़र थी इसपर। टीवी और समाचार पत्र में यह सब आने वाला था तो मंत्री जी....

© मृणाल आशुतोष



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