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@dawriter

पापा

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dhirajjha123 by  
Dhiraj Jha

 

 

पहले ही क्षमा के साथ ये बात बता दूँ की कुछ महीनों तक जब मेरे सामने उन मनहूस दिनो की कोई पोस्ट आएगी तो मैं पापा पर ना चाहते हुए भी लिखने पर मजबूर हो जाऊँगा । क्या करूँ खुद से अपना हाल कह कह कर थक गया हूँ इसीलिए यहाँ लिखने पर मजबूर हो जाता हूँ । 

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आज ही के दिन पिछले साल
” पापा गिरा दूंगा आज तो ”

” दुर बुड़बक , आज तक कोई मेरा पंजा नही गिरा पाया तू क्या गिरायेगा | लगा ज़ोर जितना तुझ मे है |

 

और मैं पूरा उनरे हाथ पर चढ़ जाता पर उनका पंजा ना गिरता | जबकी मैं बचपने से ही खाते पीते घर की मर्यादा रखने वाला बच्चा था | पापा में ताकत थी , उनकी आवाज़ में रौब था | दिल के हमेशा से कमज़ोर रहे हैं वजह थी उनका भावुक हो जाना | उन्हे देख हमेशा गर्व महसूस हुआ , हमेशा हिम्मत मिली हर परेशानी से लड़ने की ,हर मुसीबत के वक्त में डटे रहने की | जैसे वो कह रहे हों बेटा डर मत मै हूं ना संभाल लूंगा | मगर उस दिन सुबह उन्हे जब देखा ! तो मैं अन्दर तक टूट गया मेरी हिम्मत जैसे लंगड़ाने लगी | मैने हिम्मत को बैसाखियों के सहारे खड़ा किया पर जब उन्हे अपने हाथों से उठा कर बैठाया तो मानो अन्दर ही अन्दर कितनी बार रो दिया |

 

उनके वही शब्द बार बार घूमे दिमाग में ” दुर बुड़बक ये हाथ आज तक किसी से नही गिरा तुझ से क्या गिरेगा |” 

 


आज वो खुद मेरे सहारे पर थे और मैं कुछ नही कर पा रहा था | I.C.U में मरीज़ों वाले कपड़े पहने , पूरा शरीर सुईयों से छेदा हुआ | मगर वो हंसी अब भी बरकरार थी | वो हिम्मत आज भी लंगडया कर ही सही पर चल रही थी | जैसे कह रही हो ” रे डरता क्यों है ? कहीं नही जाने वाला मै | ” 

 


नही देखा जा रहा था उन्हे उस हाल में | सोचा था उम्मीद और दुआ रंग लाएगी मगर ऐसा नही हुआ । झूठ बोल कर चले गए । कहा था की मुझे कुछ नही होगा मैं ठीक हो जाऊँगा पर नही हुए । इतनी भी क्या नाराज़गी थी पा एक बार कहते तो सही के नाराज़ हैं , हम हर कोशिश कर के मनाते । मगर आप तो चुपके से चले गए । पर हम आज भी आपसे बहुत प्यार करते हैं पापा और हमेशा करते रहेंगे ये बात आप भी जानते हैं ।…

 

 



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