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@dawriter

जबाब

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 जैसे ही बड़का ठेकेदार फटफटिया से उतरा, दुलरिया झटकती हुई उसके पास पहुँच गयी।

बड़का ठेकेदार भी वैसे ही उसको ऊपर से नीचे देखा जैसा ज्यादातर मरद देखता है। "का बात है?"एक जगह पर नज़र गड़ाये हुये पूछा।

"ऊ छोटका ठेकेदार हमको जब तब यहाँ वहाँ छूता रहता है। और और रात में अपने कमरे पर भी आने को बोलता है।" तो चल क्यों नहीं जाती है? खूब पैसा देगा। "हम को आपको अपना माय बाप समझे थे पर आप भी उसी हरामखोर के जैसन निकले।"

"क्या? क्या बोली तू?" "वही बोले कि आप भी वैसन ही निकले। और वापस चल पड़ी।" "सुन! अरी सुन ना!"

दुलरिया मुड़कर उसकी ओर देखने लगी। "उस हरामखोर को ऐसा जबाब देना कि सब समझ भी जाये और कोई समझे भी नहीं।" कुछ ही देर बाद छोटका ठेकेदार के चीखने की आवाज़ आयी। सब लोग उधर भागे। अचानक न जाने कैसे दुलरिया के माथे पर रखा सब ईंट उसके पैर पर गिर गया था ।

By - मृणाल आशुतोष



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