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@dawriter

चमत्कार

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चमत्कार

जीवन में सुख दुःख आते जाते रहते हैं, लेकिन इंसानी स्वभाव है कि हम दोनों को एक ही भाव से ग्रहण नहीं कर पाते सुख के समय हम इतने प्रसन्न हो जाते हैं कि हमें कुछ और सूझता ही नहीं। भावातिरेक में कभी कभी तो ईश्वर को धन्यवाद देना तक भूल जाते हैं।

हर सफलता का श्रेय स्वयं को देते नहीं थकते और जब हम पर कोई विपत्ति आती है तो हर कोई यही कहता है कि हे भगवान ये तूने क्या किया ....हर बार मैं ही क्यों? मेरे साथ ही क्यों होता है यह सब?

वाह जी वाह !!! कुछ अच्छा हो गया तो हमने किया और बुरा हुआ तो बेचारे भगवान जी ने कर दिया ....ऐसा नहीं होता कि ईश्वर अपनी संतानों के साथ कुछ बुरा करते हों। यह हमारी सोच है, बस . भगवान तो हर क्षण हमारे साथ होते हैं। एक अंग्रेजी प्रार्थना गीत है ‘ फुट प्रिंट ऑन दा सैंड ‘....उस गीत को सुन कर मैं हर बार भावुक हो जाती हूँ ....उसमें अंत में जब ईश्वर से पूछा जाता है कि " हर बार मैंने आपके पैरों के निशान अपने पैरों के निशानों के साथ देखे लेकिन जब सबसे अधिक दुःख की घड़ी थी तब आपने मुझे अकेला छोड़ दिया ! तब आपके पैरों के निशान मुझे कहीं भी न दिखाई दिए। "

तब भगवान ने उत्तर दिया, " उस समय बस मेरे ही पैरों के निशान थे जो तुमने देखे, क्योंकि तुम्हे तो मैंने गोद मैं उठाया हुआ था पुत्र।"

सच है ईश्वर कभी हमें नहीं भुलाते वे सदा हमारे साथ होते हैं। मेरा अपना अनुभव है जब भी जीवन में मुझ पर कोई विपत्ति आयी है ईश्वर ने परीक्षा अवश्य ली किन्तु हारने कभी नहीं दिया।

एक घटना बताती हूँ ...मेरी सबसे छोटी बेटी उस समय नौ साल की थी उसके स्कूल से सुबह दस बजे के करीब फोन आया कि उसे बुखार है आप आकर उसे घर ले जाइये ....बात उन दिनों की है जब शहर में पहली बार डेंगू बुरी तरह से फैला था। मन डर के मारे कांप उठा .सारा काम छोड़ छाड़ कर दौड़ी गयी ...पहुंची तो देखा उसका चेहरा बिलकुल लाल सुर्ख और बदन बुखार से तपा हुआ ....शरीर में कंपकंपी थी और कहीं कहीं चकत्ते भी दिखे...मेरा तो जो हाल हुआ बता नहीं सकती। सरे लक्षण डेंगू के, उस समय डेंगू का इलाज आसान न था इसे खतरनाक बीमारी माना जाता था। रास्ते में उसे डॉक्टर के पास ले गयी उन्होंने भी यही कहा की हो सकता है डेंगू हो। शाम तक अगर बुखार न उतरे और चकत्ते बढ़ जाएँ तो ब्लड टेस्ट करवाना होगा। बुखार न उतरा परन्तु चकत्ते बहुत अधिक नहीं बढे थे उसे दवा देने की नाकाम कोशिश करते रही...हर बार उसने उलटी कर दी। पति हिम्मत बढ़ा रहे थे की कुछ नहीं होगा रात हो गयी उसका बुखार बढ़ गया और उसने जब उलटी की तो उसमें खून देखकर मैं सन्न रह गयी और उसने मेरी तरफ जिस तरह देखा वह नज़र मैं कभी भूल नहीं सकती उसकी आँखें कह रही थीं की मम्मा मुझे डेंगू तो नहीं हो गया-लेकिन उसने कहा कुछ नहीं मेरे चेहरे के भाव पढ़ने की कोशिश कर रही थी वह। रात भर उसे ठंडी पट्टियां रखते रहे..रात थी की बीतने को नहीं आ रही थी मेरी दोनों बड़ी बेटियों ने भी रात भर पलक न झपकी वो सारी रात रोती रहीं चुपके -चुपके।

किसी तरह रात कट गयी सुबह आठ बजे से पहले ही हम उसे लेकर लैब गए रास्ते भर मई प्रार्थना कर रही थी की हे भगवन मेरे बाच्चे की रक्षा करना ...मेरी आँखों में आंसू देखकर मेरी बेटी बोली, "मम्मा रो क्यों रही हो मैं मरूंगा नहीं ." कलेजा छलनी हो गया .( वह अब भी लड़कों की तरह बोलती है )

जब खून लिया जा रहा था तब दर्द मुझे हो रहा था और उसे तो जैसे कुछ हो ही नहीं रहा था। वह शुरू से अपने भावों को संयत रखना जानती है मुझे दुःख न हो इसलिए वह डोली मे बैठते समय भी हंस रही थी ..... खैर घर आ गए और रिपोर्ट की प्रतीक्षा करते रहे मैंने तब तक भगवन से कितनी मन्नतें मांगीं याद नहीं शाम को रिपोर्ट मिलनी थी ..धड़कते दिल से मे अपने पति के साथ रिपोर्ट लेने गयी। जब रिपोर्ट देखी तो वह नेगेटिव थी.....हमारी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। ख़ुशी के मारे मैं रोने लगी और ईश्वर को धन्यवाद दिया . यह चमत्कार से कम नहीं था कि सारे लक्षण दिखाई देने के बाद रिपोर्ट नार्मल आयी। घर आकर बेटी को गले से लगा लिया और ईश्वर के नाम का दीप जलाया।

ऐसे अनेक वाकये हुए हैं मेरे जीवन में जब ईश्वर ने मेरे साथ होने का प्रमाण दिया मुझे। उसकी सत्ता बहुत बलशाली है बस अपना विश्वास डगमगाने नहीं देना चाहिए वह सचमुच बुरे समय में हमारा भार स्वयं वहन करते हैं ....

ऐसे चमत्कार मेरे साथ एक नहीं हर बार हुए हैं जब भी कोई मुसीबत आयी, ईश्वर को साथ पाया !!!



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