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@dawriter

इंसानियत

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"भैया! ये खीरा कैसे देते हो?"

"६० रुपये किलो।"

"और मूली?"

"४० रुपये किलो।"

"बहुत महँगा बता रहे हो। थोड़ा सस्ता लगाओ ना।"

"रेट तो यही रहेगा। लेना हो तो लो नहीं तो जाओ।"

"अरे भैया, हमको पीलिया(जॉन्डिस) हो रखा है। इसीलिये मालिक ने भी नौकरी से निकाल दिया। थोड़ा कम करलो न।" "टाइम खराब मत करो। नहीं लेना तो निकल लो।"

जेब में रखे पैसे को एक बार फिर देख कर भरी आँखों से राजकुमार वहाँ से चल दिया ।

कुछ ही दूर चला होगा तो लगा कि कोई उसी को आवाज़ दे रहा है। मुड़कर देखा तो एक आदमी उसी की ओर दौड़ा आ रहा था।

"आपको खीरा और मूली खरीदना है।" "हाँ, लेकिन बहुत महँगा है।" "कोई बात नहीं । हम आपको मंडी के रेट पर देंगे।"

"आप ऐसा क्यों करोगे ,भैया!"

"कुछ साल पहले हमारे बाबूजी इसी बीमारी से मर गए थे। दवा तो फ्री में मिल जाती थी लेकिन पैसे की कमी के कारण हम फल फूल न खरीद सके।"

राजकुमार जी के चेहरे पर बढ़ती हैरत देखकर उसने आगे कहा "आज हम किसी की सहायता करने में सक्षम हैं इसलिए यह नहीं चाहते कि कोई और हमारे बाबूजी की मौत मरे।"

© मृणाल आशुतोष



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