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@dawriter

अनोखी ममता

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kavita by  
kavita

करुणा को पता चला कि वह मां बनने वाली है... वह बड़े असमंजस में थी कि कैसे बताऊँ अभय को? कहीं अभय यह न सोचे कि 'अब करुणा को सिया व सलिल के प्रति व्यवहार बदलने में देर नहीं लगेगी..!' करुणा बहुत परेशान हो गयी एक पल को तो उसने एक खुशी महसूस की उसके भीतर एक नन्ही जान का अस्तित्व है किंतु दूसरे ही पल उसे यह भी डर लगता कि अभय अवश्य नाराज हो जाएंगे उन्होंने मुझसे वादा लिया था कि तुम स्वयं कभी मां नहीं बनोगी मेरे ही बच्चों के लिए अपना संपूर्ण प्यार संचित कर के रखोगी इसी शर्त पर तो वैवाहिक बंधन में बंधे थे दोनों...

एक पल के लिए करुणा यह भूल गई कि वह अपनी कोख से संतान प्राप्ति के अधिकारी नहीं है। जिस पल विधाता ने उसके भाग्य में 'तलाक' शब्द लिख दिया और समाज के कड़े कानूनों और नियमों को परे रखकर किसी प्रकार उसके माता-पिता ने का दूसरा विवाह संपन्न करवाया वह भी अभय के बहुत ना नुकुर करने के बाद और अभय की शर्त थी कि उसके बच्चे के लिए वह अपना सारा प्यार और ममता रखेगी कभी भी वह उससे उसकी संतान के विषय मे बात नहीं करेगी किंतु अब करुणा को अपनी कोख में पल रहे मासूम बच्चे के प्रति मोह पैदा होने लगा फिर बहुत से वैचारिक तुफानो के बाद उसने ठान लिया कि वह अभय से बात करके रहेगी ..!

अभय ने काफी तर्क वितर्क के बाद हां भी बोल दी.. सलिल व सिया भी अपनी नयी माँ की संतान और अपने भाई या बहन का बेसब्री से इंतज़ार करने लगे..अभय ने भी करुणा के मातृत्व को मारने का पाप नहीं किया ..गर्भ में जीवन का आना आखिर उसकी भी तो जिम्मेदारी थी ..सब खुश थे स्वयं करुणा भी कि, अभय व बच्चे सब खुश थे और उसका ख्याल भी रखते थे..! किन्तु कोई था जो नाखुश था ...कोई ऐसा जो नहीं होकर भी था..! और उसके होने का संकेत कुछ यूं दिखा..! आये दिन करुणा को स्वप्न आने लगे कि, कोई कहता "तुम्हारी संतान ,इस दुनिया मे कभी नहीं आएगी.." करुणा चौंक कर उठ जाती..पसीने पसीने हो जाती..! डर जाती शुरू में डॉक्टर ने कहा ऐसी कोई बात नहीं है, फर्स्ट प्रेग्नेंसी में अक्सर ऐसे ख्यालात आते हैं..पर डरने की कोई बात नहीं बच्चा स्वस्थ है..! करुणा की माँ ने अपने शंका समाधान हेतु ताबीज बनवा कर करुणा को पहनाया..! फिर वो वक़्त भी आया जब करुणा को प्रसव पीड़ा आरम्भ हुई..! उसे हॉस्पिटल ले जाया गया..सभी की व्यग्रता बढ़ रही थी..ईश्वर सब भला करें। सब कुछ जल्दी जल्दी बीत रहा था..इंतज़ार की घड़ियां काटे नहीं कट रही थी तभी डॉक्टर ओटी से बाहर आई और बोली.." सॉरी हम बच्चे को बचा नहीं पाए..! सब कुछ नॉर्मल था बच्चे की धड़कन भी थी किन्तु जन्म लेते ही वो निष्प्राण था .." मगर करुणा ठीक है आप कुछ देर में उनसे मिल सकते हैं..!

अभय बच्चे करुणा की माँ सभी अवाक रह गए ..सुबह तक तो सब ठीक था सब परेशान हो गए कि आखिर सब कुछ सही होने के बावजूद बच्चा मृत कैसे पैदा हुआ? खैर किसी तरह से इस दुख की घड़ी में सभी लोगों ने करुणा को समझा-बुझाकर शांत कराया ..! भीतर ही भीतर स्वयं अभय, करुणा, मां ..सभी के मन में यह विचार चल रहा था कि आखिर ऐसा हुआ क्यों ?

अगले ही दिन करुणा की मां ने अभय को नहीं बताया और एक पंडित जी से विचार विमर्श किया उसने सारी परिस्थितियां बतायी और उसके बाद यह भी बताया कि अभय की पहली बीवी को मरे 3 वर्ष हो चुके हैं... पंडित जी ने विचार विमर्श करने के उपरांत करूणा की मां को एक अविश्वसनीय बात बतायी.. उन्होंने कहा कि , 'अभी वह इस बात को लेकर आश्वस्त तो नहीं है ..किंतु उन्हें ऐसी आशंका है कि संभवत: अभय की पहली पत्नी की आत्मा अभी भी इस संसार मे है ...वह मुक्त नहीं हुई है ऐसे और भी कई मामले उन्होंने इससे पूर्व भी देखे हैं .. इस विषय मे उन लोगों से बात करना ।"

... करुणा और अभय ने माँ की बातों को पहले तो विश्वास नहीं किया मगर करुणा को अपने उस स्वप्न की याद आयी और फिर कुछ सोच कर उसने पंडित जी को अपने घर बुलाने का निर्णय लिया हालांकि वह इन सब अंधविश्वास युक्त बातों पर यकीन नहीं करती थी अभय भी विश्वास नहीं करता था, किन्तु वे दोनों मां को मना भी नहीं कर सकते थे।

पंडित जी ने नियत तिथि पर घर पर अनुष्ठान किया और उस अनुष्ठान में करुणा ही बैठी....अभय की पहली पत्नी का आह्वाहन करते हुए पंडित जी ने यज्ञ करना आरंभ किया कुछ ही देर में करुणा का शरीर कांपने लगा और अचानक पलक झपकते ही उसके चेहरे के हाव भाव परिवर्तित हो गए उसका शरीर पर कंपकपाने लगा उसकी आंखें लाल हो गयी और वह हंसने लगी ।

पंडित जी समझ गए कि करुणा के शरीर के भीतर अभय की पहली पत्नी का प्रभाव स्थापित हो गया है कि तभी पंडित जी ने उससे पूछा : " कौन हो तुम? क्या चाहती हो ?

" मैं कोमल हूं अभय की पहली पत्नी ..! " उसने कहा।

पंडित: "क्यों आई हो वापस ...अब क्या चाहती हो तुम? अब दुनिया से जाने के बाद भी उनकी गृहस्थी चौपट करना चाहती हो तुम ?

अभय करुणा को देखकर विस्मित था करुणा का व्यवहार शत-प्रतिशत उस की पूर्व पत्नी कोमल के व्यवहार जैसा लग रहा था वही हाव भाव, वही आवाज ,वैसी ही हरकतें..!

कोमल: हां मुझे आना पड़ा अपने बच्चों की खातिर !

पंडित: क्यो क्या ये दोनों तुम्हारे बच्चो के साथ गलत व्यवहार करते हैं?

कोमल : नहीं ! ऐसा नहीं है...करुणा बच्चों का बहुत ध्यान रखती है किंतु मैं उसका बच्चा पैदा नहीं होने दूंगी। उसका बच्चा होगा तो उसका व्यवहार मेरे बच्चों के प्रति बदल जाएगा

पंडित : क्या तुम्हें अभय से कोई शिकायत है?

कोमल:नहीं वैसे मुझे कोई शिकायत नहीं है उनके जैसा देवता इंसान तो मैंने इस दुनिया में कहीं नहीं देखा वह आज भी करुणा के साथ होकर भी मुझसे प्रेम करते हैं।

पंडित : तो फिर क्या? क्या परेशानी है तुम्हें?

कोमल : कोई परेशानी नहीं... सिर्फ अपने बच्चों की चिंता है मुझे...!! मैं जानती हूं ... अपने बच्चों से ममता होती है यदि इसका अपना बच्चा होगा तो इसकी ममता बंट जाएगी..! मेरे बच्चों का ध्यान नहीं देगी .. मैंने इससे पहले भी कहा था ऐसी गलती ना कर.. मैं तेरा बच्चा इस दुनिया में नहीं आने दूंगी " और देखो वही हुआ..।

पंडित अवाक रह गए उन्हें जिस चीज की आशंका थी वही शत-प्रतिशत घटित हो रही थी..स्वयं अभय भी..विस्मित था!

पंडित जी ने अभय की ओर इशारा किया और कहा 'आप समझाइए ' ...अब अभय उसकी तरफ मुखातिब हुआ ।

अभय: कोमल ! तुम यहां क्या कर रही हो? क्या तुम्हें मुझ पर और करुणा पर विश्वास नहीं? क्या करुणा को मां बनने का हक नहीं? वह तुम्हारे बच्चों की इतनी चिंता करती है इतनी समर्पण के साथ उनकी देखरेख करती है तो क्या तुम्हें यह लगता है कि खुद मां बनने के बाद वहीं बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करेगी यह तुम्हारी गलतफहमी है। आज तुम्हें वचन देता हूं कि तुम्हारे बच्चों को.. ' हमारे बच्चों ' को मैं कभी भी तुम्हारी कमी महसूस नहीं होने दूंगा और खुद करुणा ने भी मुझसे इस बात का वादा किया था किंतु एक संतान की हत्या करना.. गर्भ में आए हुए शिशु को मार देना उचित नहीं लगा इसलिए हमने उसे जन्म देने के बारे में सोचा यदि तुम चाहती हो, करुणा को मां बनने का सुख नहीं मिलना चाहिए तो यही सही। और अगर करुणा ये जान जाएगी कि तुम्हारी इच्छा नहीं है कि वह मां बने, तो शायद वह भी मां बनने की तरफ सोचेगी ही नहीं...!

जब तुम सारी बातें जानती हो तो क्या इस बात को नहीं जानती..! अंतिम शब्द में कठोर होता हुआ अभय बोला ..। दो मिनट तक करुणा के शरीर मे कोमल.. हवन की जलती हुई थी अग्नि को देखती रही.' जैसे उसके अंदर कुछ अंतर्द्वंद मचा हुआ था। वह असमंजस में खोई हुई थी करुणा का शरीर झूल रहा था कि.. अचानक उसका शरीर उठ खड़ा हुआ उसने कांपते हुए कहा...

कोमल: आप सही कह रहे हैं !! मुझे कोई हक नहीं एक मां को उसके ममता से वंचित रखने का..! पर मैं अपने बच्चों की ममता में अंधी हो गई थी शायद ..! विवश हो गई थी...! आज भी इन की ममता के मोह से मैं मुक्त नहीं हो सकी .. मुझे भरोसा ही नहीं था करुणा पर ...! मुझे नहीं लगा था कि कोई मेरे बच्चों को अपने बच्चों जैसा समझकर पाल सकता है। इसीलिए स्वार्थी हो गई थी मैं..!! और सोच रही थी कि यदि इसका बच्चा मर जाए तो यह हार कर, झक मारकर मेरे बच्चों को प्रेम करेगी ...!! अपने बच्चों के मोह में अंधी और स्वार्थी हो गई थी...! कितना गलत कर रही थी मैं ...मुझे माफ कर दीजिए..!

पंडित जी ने आंख से इशारा किया और अभय को संयम में बात करने को कहा...! अभय ने कहना शुरू किया

अभय: ' नहीं अगर तुम चाहती हो कि हम संतान ना पैदा करें तो ठीक है हम नहीं करेंगे.. किंतु तुम्हारे बच्चे? वे भी तो पूछते हैं ..उन्हें कब एक छोटा भाई या बहन मिलेगी?

कोमल: ' हां गलती हो गई मुझसे' .. बच्चों को, तुम्हें और करुणा .. सब को बच्चे की जरूरत थी ..! पाप हो गया मुझ से , हे ईश्वर ! मुझे क्षमा करना ..ठीक है अभय !! माफ कर दीजिए मुझे.. ये मेरी पहली और आखरी गलती है अब मैं जा रही हूं ..अब कभी नहीं आऊंगी.. मैं तो यह संसार छोड़ कर जा चुकी थी और करुणा ही तो आखिर मेरे बच्चों को पिछले 2 साल से मां का प्रेम दे रही है ..! कैसी औरत हूं? जो माँ बन कर भी ,माँ का दिल नहीं है ...और कैसी माँ हूं मैं ?अपने बच्चों के चेहरे की भी हंसी छीन ली यह बच्चे बेचारे अपने आने वाले भाई/ बहन का इंतजार कर रहे थे ..! उनकी खुशी छीनने वाली माँ बन गयी ...! (कहकर वो फूट फूट कर रोने लगी ..)

"माफ कर दीजिए मुझे पंडित जी.. मैं जा रही हूं मेरे नाम से गंगा किनारे, अभय के हाथों ' कोमल ' का अंतिम तर्पण करवा दीजिए और अभय ! गंगाजल की कुछ बूंदें मेरे नाम से अपनी अंजुली से प्रवाहित कर और दीए को गंगा में बहाने के साथ ही आप मुझे मुक्ति दे देंगे..! आज मेरी अंतरात्मा से यह बोझ उतर गया ...! यह कहकर तेज कंपन के साथ करुणा का शरीर कांप उठा और वह निढाल होकर गिर पड़ी..! करुणा होश में आ गयी, अभय करुणा के शरीर को थाम कर रोने लगा..! आंसुओं के दौर के बीच, वे दोनो इस घटना से विस्मित और खुश भी थे कि अब कोमल की आत्मा चली जायेगी।

दूसरे ही दिन गंगा किनारे पंडित जी ने उसकी पूरी विधि विधान के साथ अभय के हाथों अंतिम क्रियाविधि और तर्पण विधि करवाई। ऐसा लग रहा था अभय की अंजुली जब गंगाजल नदी में प्रवाहित कर रही थी तो दो प्यासे होंठ उसकी अंजुलियों से स्पर्श करते हुए परम तृप्ति को प्राप्त कर लिए.. और एक आकृति दीए की ज्योति के साथ बैठ सुदूर जल में विलीन हो गयी ...!

सुनने में यह बातें अविश्वसनीय लगती है किंतु ये शत प्रतिशत सत्य हैं..! अभय और करुणा के मुँह से उनके स्वयं के अनुभव से जुड़ी, इस "अनोखी ममता" की कहानी को सुनकर मैं रोमांचित हो उठी ..!

ईश्वर कैसे खेल रचते हैं , आज के इस वैज्ञानिक युग मे,जब कि, हम चाँद पर जा चुके हैं ...आज भी ऐसे अविश्वसनीय तथ्यों आत्मा, परमात्मा, लोक परलोक, मृत्यु के बाद का जीवन ,भटकती प्यासी आत्मा का अस्तित्व...इन सब पर भरोसा तो नहीं होता किन्तु सत्य क्या है अनुभव किये हुए लोगों ने क्या महसूस कर रखा है इन पर कुतर्क करने का कोई फायदा नहीं है ..संसार रहस्यों से भरा पड़ा है। किंतु एक बात तो पक्की है कि, इस घटना को सुनकर मुझे भी यही लगा कि ...ममता वास्तव में अनोखी होती है एक माँ अपनी संतान के लिए कुछ भी कर सकती है। संभव है कि ममता के कारण कोमल की आत्मा ऐसा करने पर मजबूर हो गई हो? क्यों नहीं हो सकता !! ये संसार रहस्यों से भरा पड़ा है और इस रहस्यमयी संसार में हर चीज संभव है...!

-कविता जयन्त श्रीवास्तव

Image Source : fernie



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