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@dawriter

अंतर्द्वंद

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उसने दिल निकाल कर कब्र में दफना दिया है। जिन्दा है वो मगर बात नहीं करता, सुनता भी नहीं, जब कुछ समझता है तो मुस्कुरा देता है। फ़र्क़ नहीं पड़ता उसको किसी भी बात से, किसी भी सोच से, किसी भी जज्बात से।

ये अचानक से नहीं हुआ है पहले दिल था उसके पास हँसता खेलता हुआ, फिर उसने सपने देखे और सपने बादल बन गए और वो उड़ने लगा, उसका दिल और भी खुश होने लगा, फिर सपने हकीकत बनने लगे वो और खुश हुआ उसका दिल और भी ज्यादा हिलोरे मारने लगा, धीरे धीरे करके सारे सपने हकीकत बन गए, वो बहुत खुश हुआ, दिल उन्मुक्त उड़ान भर रहा था बहुत ही खुश। मगर अब कोई सपना नहीं था उसके पास धीरे धीरे दिल बैठा जा रहा था, सपने में मजा मिलता था हकीकत में वो गायब हो चूका था, अब दिल टूट रहा था, डर रहा था सहम रहा था, सिसक रहा था। रात कहो अक्सर चमगादड़ आ जाते थे उसे डराने लगते थे वो और डर जाता था और दिल रोने लग जाता था। फिर उसने दिल को निकाला और छुपा लिया अपनी जेब में। अब वो हर चौराहे पर से गुज़र जाता है अपने दिल को जेब में छुपाते हुए, नज़रें नीची करके चलता है ध्यान जेब पर ही रहता है कि कोई दिल को चुरा न ले जाए। मगर सब जान गए हैं कि उसका दिल उसके जेब में है। वो चौराहे से गुज़र रहा होता है कई सारे कौवे आ जाते हैं उसके जेब पर हमला कर देते हैं। वो जेब संभालकर भागने लगता है कौवे उसका पीछा कर रहे होते है तभी वो होता है जो नही होना था दिल जेब से निकलकर जमीन पर गिर जाता है और मर जाता है। अब सब शांत था, न तोते नज़र आ रहे थे और न ही चमगादड़, किसी के वजूद का कोई निशान न था। अब सिर्फ वो था और उसका मरा हुआ दिल। वो उसे उठाता है और एक कब्र में दफ़न कर देता है। सपने मर चुके थे और हवा में लाश बनकर तैर रहे थे। घडी घडी टकराते रहते थे उससे, वो देखता था, घूरता था और आगे बढ़ जाता था। अब वो खुद में ही एक लाश लेकर घूम रहा था।
तभी एक आग लग जाती है, सारे सपने पकने लगते हैं वो बेचैन होने लगता है, अजीब सी उत्तेजना में वो इधर उधर भागने लगता है। वो महसूस करता है अपने दिल की कमी , भटकते भटकते जा पहुँचता है अपने दिल की कब्र पर, खोदता है उसको और देखता है खौफनाक मंजर, उसके दिल को चूहे खा रहे थे, बहुत देर हो चुकी थी और चूहे उसका पूरा दिल खा चुके थे। वो इश्क़ में था और उसके पास दिल नही था। वो उठता है और समेटता है खुद को और निकल जाता है उस दरिंदो की दुनिया में एक दरिंदा बनने को एक कुटिल मुस्कान के साथ।

सौरभ तिवारी 



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