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एक स्नेह यह भी.... ----

rgsverma   205 views   11 months ago

स्मृतियाँ कितनी विचित्र होती हैं.न चाहते हुए भी साथ नहीं छोड़ती . और अगर चाहो तो याद नहीं आती. अच्छी स्मृतियाँ तो यूँ धूमिल हो भी सकती हैं, पर कुछ दु:खद और कडूआहट भरी अथवा जटिल-सी स्मृतियाँ तो इंसान पूरी जिन्दगी ढोता रहता है, और वह बस निर्लज्जता से जुड़ी रहती हैं, हमारे साथ, हर समय. 

डायन

ujbak   50 views   1 year ago

इमली के पेड़ की छोटी-छोटी पत्तियां हवा में बही जा रही थीं। सर्र-सर्र की आवाज़ करती पत्तियों ने जैसे ठान लिया हो कि मदनी के इस रहस्य को वे और डरावना बना देंगी।

अनोखी ममता

kavita   327 views   10 months ago

एक माँ की ममता से जुड़ी अविश्वसनीय कहानी.....रोमांचक वर्णन

लघुकथा-- नजरिया

sunilakash   803 views   5 months ago

कई लोग सामाजिक समस्याओं के बारे में बहुत अच्छे तरीके से सोचते हैं किंतु व्यवहार में बिल्कुल उल्टा करते रहते हैं, और उन्हें कभी यह अहसास नहीं होता कि वे उल्टा कर रहे हैं।

त्रियाचरित्र : वरदान या अभिशाप

poojaomdhoundiyal   696 views   8 months ago

"त्रियाचरित्रं पुरुषस्य भाग्यम दैवो न जानती कुतो मनुष्य:"मतलब पुरुष के भाग्य और औरत के त्रियाचरित्र को देवता भी नहीं समझ पाये तो मनुष्य क्या है।

पक्की सड़क(कहानी)

rahulsingh   53 views   1 year ago

कई लोगों ने कहा_"मास्टरजी आप भी क्यों इतना शारीरिक कष्ट करते हैं, मोटरसाईकिल ख़रीद लीजिये। ख़ाली हाज़िरी ही तो लेनी होती है, मोटरसाईकिल ले लीजियेगा तो और जल्दी लौट आइयेगा, समय बर्बाद नहीं होगा।

माँ तुम जादूगर हो…

dhirajjha123   13 views   1 year ago

मन ही मन कहता रहा माँ तुम जादूगर हो ना जाने कहाँ से लाती हो इतनी हिम्मत | माँ सचमें तुम से बहुत प्यार है बहुत ज़्यादा |

पुराने किस्से

dhirajjha123   14 views   1 year ago

​पूरे साल भर पहले की बात है उसके बाद बहुत कुछ बदला पर लोग और उनके हाल अभी भी बदलाव की उम्मीद वाले किनारे पर ही खड़े हैं । सफर की घटना

“पिता से पहले पिता के बाद”

dhirajjha123   22 views   1 year ago

डेढ महीने हस्पतालों चक्कर काटे थे उन भाईयों ने अपने पिता को लेकर । वो पिता जिसका घूरना ही काफी होता था इन बेटों के मन में वो डर पैदा करने के लिए जो एक बाप को लेकर हर बेटे में होता है उस बाप को थप्पड़ तक मारे थे इन बेटों ने ।

पापा

dhirajjha123   5 views   1 year ago

​पहले ही क्षमा के साथ ये बात बता दूँ की कुछ महीनों तक जब मेरे सामने उन मनहूस दिनो की कोई पोस्ट आएगी तो मैं पापा पर ना चाहते हुए भी लिखने पर मजबूर हो जाऊँगा । क्या करूँ खुद से अपना हाल कह कह कर थक गया हूँ इसीलिए यहाँ लिखने पर मजबूर हो जाता हूँ ।

बचपन और नानी का घर

Manju Singh   1.06K views   6 months ago

बचपन एक बार जाता है तो कभी लौट कर नही आता लेकिन उसकी यादें हैं की जाने का नाम नहीं लेतीं। पढ़िए यह रचना जो निश्चय ही आपको आपके बचपन में ले जायेगी ।

कहानी— सोच के दायरे

varmangarhwal   137 views   1 year ago

दोपहर के एक बजे बैंगलोर रेल्वे स्टेशन के टिकट काउंटर से टिकट लेकर उम्र में पच्चीस(25) साल का क्लीन शेव चेहरे वाला सुन्दर हाथ में ऑफ़िस बैग लिये प्लेटफार्म पर आकर चेयर पर बैठ गया.

प्यार नहीं था तो क्या था..

Kalpana Jain   1.05K views   2 months ago

मुझे लगा कि वो मेरा एकतरफा प्यार था लेकिन इतने सालों बाद पता चला कि वो भी मुझसे प्यार करता है...

बहू या अलादीन का चिराग?

rita1234   1.53K views   4 months ago

हमारे देश में बहु को अलादीन का चिराग माना जाता है जो कभी भी कुछ भी करने के लिए उपस्थित रहती है।

घर वाकई स्वर्ग है

dhirajjha123   81 views   1 year ago

घर में घुसते ही पापा वाला खाली पलंग जब तक रुलाए तब तक माँ की मुझे देख चमकती आँखें मुस्कुराने पर मजबूर कर देती हैं और लगता है माँ में ही कहीं पापा भी बाहें फैलाए सीने से लगाने को बेचैन हैं