व्यापार वर्धक यंत्र

इस बरसात में लकड़ियों के खरीदार मिल रहे हैं । पहले तो मुझे लग रहा था श्मशानघाट पर दुकान खोलकर गलती कर दी। लेकिन भला हो उन पंडितजी का अब तो धंधा चौचक हो रहा है पिछले दो घंटे में बारिश के बावजूद लोग घाट की दुकानें छोड़कर मेरे पास आ रहे हैं । "

अनोखी ममता

एक माँ की ममता से जुड़ी अविश्वसनीय कहानी.....रोमांचक वर्णन

बदलते बारिश के मायने..

बचपन से युवावस्था और बच्ची से विवाहिता बन जाने के मध्य ..आये छोटे छोटे मनोभावों का वर्णन

मुखर्जी नगर- सपनों का नगर

मुखर्जी नगर, दिल्ली में स्थित है, जो कि लोक प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी हेतु प्रसिद्ध है।

किसान आत्महत्या का खौफ़ उनके बच्चों के दिलो में

पिछले कुछ समय मे किसान बेबस हो आत्महत्या कर रहा है। मैंने इस कहानी के माध्यम से एक किसान परिवार की बच्ची का डर दिखाया है कि किस तरह से एक बेटी अपने पिता के लिए डरी हुई है कि कही वो भी आत्महत्या न कर ले।

"दया ही सभी धर्मों का मूल है"

एक अनुभूति है मूक पशुओं की दुर्दशा देखकर। वो पशु जो अकारण ही दंड के भागी बनते हैं और 'अभिव्यक्ति' से भी वंचित रहते हैं।

पीली चुनरी

ये एक अधूरी प्रेम कहानी है।जिसकी शुरुआत तो हुई , पर अपने मुकम्मल मुकाम तक न पहुँच सकी ।

पुरस्कार

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्कूल में भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा था। मंत्री जी पहली बार मुख्य अतिथि के हैसियत से अपने ही स्कूल में उपस्थित थे।

...रामकिशोर ड्राईवर

अगर रामकिशोर का हुलिया आपको बताया जाये तो मेरे सहित कुछ लोगों की राय थी कि वह अपने समय में तमिलनाडु के कुख्यात दस्यु सम्राट वीरप्पन का मिनी रूप लगता था...

🌴 प्रकृति ने घोले रंग 🌴

प्रकृति ने रंग घोल दिये हैं हल्के-गहरे प्यारे-प्यारे। मन को बहुत भले लगते हैं दृश्य सलोने न्यारे-न्यारे।

एक स्नेह यह भी.... ----

स्मृतियाँ कितनी विचित्र होती हैं.न चाहते हुए भी साथ नहीं छोड़ती . और अगर चाहो तो याद नहीं आती. अच्छी स्मृतियाँ तो यूँ धूमिल हो भी सकती हैं, पर कुछ दु:खद और कडूआहट भरी अथवा जटिल-सी स्मृतियाँ तो इंसान पूरी जिन्दगी ढोता रहता है, और वह बस निर्लज्जता से जुड़ी रहती हैं, हमारे साथ, हर समय. 

जान

इंटरव्यू के अंतिम चरण में चयन न होने पर हताश और क्रुद्ध आशुतोष कमरे पर पहुंचते ही पत्नी पर बरस पड़ा।

इश्तहार

इश्तहार तीन दिन से लगातार हो रही बूंदाबांदी से बाजार में कीचड़ ही कीचड़ हो रहा है ग्राहकी तो दूर रहवासी भी दरवाजा खोलकर नहीं झांकते। ऐसे माहौल में ग्राहक का आना किसी देवदर्शन से कम सुख नहीं देता । लेकिन आनेवाले ग्राहक को देखकर बाई एकदम से ठस्स हो गई

कल्पना

क्या होती है कल्पना,क्या निकलता है उनका नतीजा

प्रारब्ध

हालांकि ठाकुर साब से मेरी मित्रता अधिक पुरानी भी नहीं थी. मात्र लगभग साढ़े तीन साल हुए थे, उनसे मुलाक़ात हुए, और वह भी वाकिंग प्लाजा में. कॉलोनी का यह पार्क टहलने वालों के लिए स्वर्ग से कम नहीं था.

एक स्वप्न की मौत

"...मैं जब भी दिल्ली जाता सुरभि से मुलाकात जरूर होती. वह अपनी व्यस्तता के बावजूद मेरे लिये समय निकालती और हम सब मिलकर कुछ अदद मिली-जुली यादों में उलझ जाते. सुनिधि ने सुरभि को अपना प्यार और ममता उड़ेलने का एक और जरिया प्रदान कर दिया था.... "

बाबूजी वो गुड़िया ला दो

आज छुटकी ने फिर से अपने मजदूर पिता से एक फरमाइश करदी....बाबुजी आज तो हमको वो गुड़िया ही चाहिये बस जो हमने दुकान पे देखी थी...

क्षितिज के पार

"...इस बीच जो बात मुझे उलझन में डालती रही वह सृष्टि के प्रति मेरी सोच और उसको लेकर आत्मग्लानि थी. मुझे लगता था कि उसे मैंने मंझधार में छोड़ दिया था..." (कुछ चुनींदा अंश)

वृद्धाश्रम

"झूठ और केवल झूठ! मेरा एक छोटा सा काम करने में तुमलोगों की नानी मर जाती है। दो महीने से कह रहा हूँ कि थोड़ा काशी ले चलो लेकिन नहीं! मेरे पेंशन पर पूरा हक है लेकिन मेरा ख्याल रखना नहीं हो पाता है इनसे।इससे अच्छा तो मैं वृद्धाश्रम चला जाता।"

कर्तव्यबोध

" बेटी! आंख से आँसू पोछते हुये कहा, शायद तू ही ठीक कहती है। मैं उसके पैर पकड़ लूँगा। पर तेरी शादी वहीं करूँगा जहाँ तू खुश रहेगी।"

इंसानियत

राजकुमार जी के चेहरे पर बढ़ती हैरत देखकर उसने आगे कहा "आज हम किसी की सहायता करने में सक्षम हैं इसलिए यह नहीं चाहते कि कोई और हमारे बाबूजी की मौत मरे।"

"बस... उस पल का तुम इंतजार करना"

ये मेरे जीवन की पहली स्वरचित कविता है जिसे मैंने एक संदेशात्मक रूप में लिखा है या यूँ कहें कि ये मेरा पहला प्रेम पत्र है जिसे मैंने उस लड़की के लिए लिखा है जिससे मैं बेइंतेहा मोहब्बत करता हूँ

WHERE DOES AKRAM MALIK STAY?

Stories reflecting today's times of fear, mistrust and love

घातक न हो जाए कर्जमाफी

किसानों को कर्ज माफ़ी की सौगात क्यों, अन्य वह लोग भी कर्ज माफ़ी के हकदार है, जिन्होंने रोजगार शुरू करने के लिए बैंक ऋण लिया था, लेकिन किसी कारणवश उनका रोजगार चल नहीं पाया और वो बैंक के कर्जदार बन गए. कर्ज वसूली का समय बढ़ाया जा सकता है, लेकिन कर्जमाफी जायज नहीं है.