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@dawriter

मासूम बचपन

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soni by  
soni

जिन्दगी की हकीकत यही हमारी,
धरती बनी बिस्तर, आसमान चादर,
सर्द रातों की ठिठुरन से कांपते नन्हें कदम,
माँ पिता के साये से ओझल जिन्दगी,
मिलता नहीं कहीं बेबसी को सहारा,
फिर भी जीवन से कभी ना हारें,
रब ने तो जिन्दगी की नेमत दी है,
संघर्षों के मैदान में डटेंगें हम,
हालत के आगे नहीं झुकेगें हम,
सर्दी की ठिठुरन, गर्मी की चुभन,
इसमें तपकर ही निखरेगें हम,
किरण रोशनी की कोई तो दिखाएगा,
आँखों में मरते सपनों को फिर जगाएगा,
टूटते पंखों को कोई तो परवाज दे जाएगा,
फुटपाथ पे मिली जिन्दगी को कोई तो,
नवजीवन देकर जाएगा,
महसूस करें कोई बचपन के खोने को,
गरीब है पर हक तो हमें भी हैं पढ़ने का,
दुःखों के साये में खोया बचपन,
सूकुन से सो जाता धरती के आँचल में,
आसमान पिता का साया बन जाता,
जीवन के इस दौर में भी,
यह बचपन कैसे जीवन को जी जाता,
वक्त से पहले बड़े होकर बचपन,
दर दर की ठोकर खाता,
मासूम मन कितने अरमान दफनाता,
सर्द रातों में ठंड से कंपकंपाता,
गर्मी के थपेड़ों से झुलस जाता,
सच मासूम बचपन गरीबी के बोझ तले खो जाता।।
तेरे बिन तेरे संग
राधे कृष्ण
#मीनू

Image Source: poipleshadow



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