बात जरा सी

बात जरा सी समझा क्यूँ नहीं देते

अजनबी

अजनबी थे अजनबी बन गये shayari

परख

प्रतयेक मनुष्य की स्वयं की एक अभिव्यक्ति होती है

ज़ालिम परिंदा

क्या आपकी जिंदगी में भी है कोई जालिम परिंदा ?

Shayari

थोड़े से हम भी उड़ने लगे हैं।दबी हुई बात को कहने लगे हैं।

"मुन्तिज़ार"

ख़्वाबों के पूरे होने का मुन्तिज़ार अब नही होता

Shayri

आग ही नहीं जलती हर बार.......Shayari

जिंदगी की जद्दोजहद

जिंदगी की उथल-पुथल, एक जद्दोजहद सी है.....

मौसम

सुबह हुई पर धूप नहीं है.......