जिंदगी की जद्दोजहद

जिंदगी की उथल-पुथल, एक जद्दोजहद सी है.....

शोर

किसी के दिल की आवाज़ दूसरे तक पहुँच ही नहीं रही है। हर किसी को एक ख़ामोशी ने घेरा हुआ है। इतना की उसकी चीख किसी भी और तरह के शोर की आवाज़ को दबा दे रही है। ख़ामोशी और अकेलेपन के बदल गरज कर हर शोर को दबा दे रहे है।

निष्ठुर

परिवार मे हमसे बेहद करीब पर कठोर , डर और डाँट का दूसरा नाम , पर आज बहुत याद आता है वो शख्स ।

'सहर '

मैं कोई गुजरा हुआ वक्त नहीं ....

मुंतजिर

इंतज़ार करना हर शख्श के लिए आसान नहीं ......

कायनात

ये कायनात मुझसे है या मैं इस कायनात से हूं।

सच

फिसलते पाँव अक्सर झूठ की जमीन पर मिले हैं,

सागर के किनारे

सागर के किनारों सी तटस्थ, और एकल जिंदगी की एक अधूरी प्रेम कहानी....

पेड़

मनुष्य निरंतर उन चीजों का ही विनाश करता जा रहा है, जिनसे उसके जीवन का वजूद है।

मेहनत कश शहज़ादी।

एक मज़दूर लड़की का अपने आशिक़ के साथ बिताए हुए कुछ लम्हों का हसीन मंज़र।

इश्क की बातें

सुनोगे जब भी तुम इश्क की बातें नाम मेरा याद आ जाएगा

Shayari

आ गए जो तेरे शहर क्या होगा। उस वक्त का पहर क्या होगा।

अनुभव

अनुभव इंसान की जिंदगी को आसान बनाने में ख़ास भूमिका निभाते है।

ये मेरा दर्द घटा दे कोई...

एक ग़ज़ल जो काफी वक़्त पहले कही गयी थू, पेश कर रहा हूँ... उम्मीद है सब को पसंद आएगी.

Shayari

थोड़े से हम भी उड़ने लगे हैं।दबी हुई बात को कहने लगे हैं।

Shayri

आग ही नहीं जलती हर बार.......Shayari

होता

रदीफ़ - तो होता कहा जो दिल का किया तो होता मेरा जहाँ भी तेरा तो होता

दिल का हाल

कल्ब में बसी चाहत को कहाँ कोई जान पाता है..बस इसी दर्द को शायरी में लिखने की कोशिश

Shayari

दो दिलों को यूँ आपस में टकराने दो। भेद-भाव को अपने घरों से मिटाने दो।

खाना ठंडा हो रहा है…

काश की आह नहीं उठेगी अक्सर, आईने में राही को दिख जाए रहबर, कुछ आदतें बदल जाएं तो बेहतर, दिल से लगी तस्वीरों पर वक़्त का असर हो रहा है… …और खाना ठंडा हो रहा है।

मुर्दा बोल रहा है

कभी सुना है क्या लाश को बोलते हुए ? मैंने देखा है उसे कब्र में रोते हुए ।

वो बात

इन बातों में वो बात नहीं...........

डर लगता है

हम भले ही कह ले की आज हर कोई अकेला है लेकिन ये भी सच है कि कहीं न कहीं वो अपने अंदर एक डर भी समेटे हुए है।

मैं तुम और ये आवारगी ।

जिन्दगी में अगर कभी बिछड़ना हो तो, एक काम करना बस जरा सा तुम मेरा मान करना। मुझसे कभी किश्तो मे मत बिछड़ना जब, मैं मुकम्मल नींद मे चला जाऊँ तब, तुम मुकम्मल तौर पर बिछड़ जाना, बस ज़िन्दगी में इतना तुम अहसान कर जाना।