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@dawriter

Shayari

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दो दिलों को यूँ आपस में टकराने दो।
भेद-भाव को अपने घरों से मिटाने दो।
तोड़ दो ऊँच-नीच के बंधन को,
अब तो सहर को नई दिशा में जाने दो ।



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