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@dawriter

#सानिध्य

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nis1985 by  
nis1985

निशा की कलम से....

अपनी अविरल छटा बिखेरता हुआ वो मोहक चाँद,
जब अपनी अनुपम,शीतल और लावण्य किरणों से

इस बोझिल से अंतर्मन को सराबोर कर देता है,
तो ये नश्वर देह अपनी समस्त नकारात्मकता

मलिन कुंठाओ,द्वेष,इर्ष्या,लोभ मोह,काम का
त्याग करने को पूरी तरह से अग्रसर हो जाता है

और हृदय भी ,उन सभी क्षणिक तामसिक विचारो से
स्वयम को उस बन्धन से मुक्त करना चाहता है

जो मलिन हृदय की शुद्धता में उसका मार्ग रोककर
अवरुद्ध उतपन्न करने हेतु आतुर हुआ जा रहा है

और जब हम इन समस्त क्रियाओ पर,अपनी इंद्रियों पर
विजय प्राप्त कर लेते है, तो स्वयं से, शुद्ध अंतर्मन से

हमारा मिलन हो जाता है,फिर लोलुपता,काम,क्रोध का
कोई अस्तित्व ही नही रह जाता,सब नश्वर हो जाता है

फिर सारी दैवीय शक्तियां एक साथ एकत्र होकर
हमे अपने सानिध्य का सौभाग्य प्रदान करती है...!!©

निशा रावल
बिलासपुर, छत्तीसगढ़



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