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@dawriter

जिंदगी का फलसफा

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nis1985 by  
nis1985

 

धुआँ धुआँ सा है जहाँ,
रौशनी बहुत कम है.....
सभी से प्यार कर लो,
ज़िंदगी बहुत कम है....
नफरत और ईर्ष्या है क्या,
बस मन का एक मैल है....
सबको खाक होना है,
यही तो जीवन का खेल है.....
इस प्यार के अलावा,
और क्या दे सकोगे तुम...
ये अहंकार और घमंड,
मन का एक वहम है...
खाली हाथ आये हैं,
खाली हाथ ही जाना है....
कौन राजा,कौन रंक,
सबको एक हो जाना है....
विनम्रता और व्यवहार ही,
एक दिन काम आना है....
तेरे "मैं" का ये अहम,
बस मिट्टी में मिल जाना है...!!!!

निशा रावल 
बिलासपुर



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