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@dawriter

ज़ालिम परिंदा

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emotionseeker by  
emotionseeker

 

एक परिंदा ऐसा जो था बड़ा ज़ालिम,
मेरी तकदीर की हर तदबीर ले उड़ा,
जवानी की ख्वाहिश तो बचपन ले उड़ा,
कमाने की ख्वाहिश तो मासूमीयत ले उड़ा,
प्यार की ख्वाहिश तो अपना ले उड़ा,
हँसने की ख्वाहिश तो रिश्ते ले उड़ा,
जीने की खवाहिश तो हसरतों के पंख ले उड़ा,
और मरने की ख्वाहिश तो हिम्मत ले उड़ा,
एक परिंदा ऐसा जो था बड़ा ज़ालिम,
मुझसे मेरी जिंदगी का हर तस्सवुर ले उड़ा।।



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