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@dawriter

ग़ज़ल

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sunilakash by  
sunilakash

किससे  करे  शिकायत  ठग लें जिसे  उजाले।
पलकों ने जब किसी के हों  ख़ाब नोंच डाले।।1।।
है एक  आम  आदमी  की  कोशिश  यहां नकारा।
फिर उम्मीद  को कोई  भी कैसे गले लगा ले।।2।।
फिलहाल   तो  मुसीबतें   हैं,  राहतों  से   बढ़कर।
मायूसियों   के   हरदम   रहते  हैं  बोलबाले।।3।।
कुछ भी न होगा  हासिल, हर आदमी से  कह दो।
की वोह अपनी आरजुओं के पर काट डाले।।4।।
जिनको  नहीं  है  मरना साहिल  की मौत जाकर।
धारे  के  बीच  जाकर  कश्ती  वही सम्भाले।।5।।


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