0
Share




@dawriter

कुछ पंक्तियां

2 20       

 

 

ग़म का साथी शराब है
और तन का साथी शब़ाब।

मुकम्मल मोहब्बत की चाह में
सब लुट गए इसी राह में।

मेरे वजूद की कहानी है मशहूर
वो मुझसे दूर मैं खुद से दूर।

वह मरना चाहता है

उसे जीने का तजुर्बा है।

अगर मन काबू होता
तो दिल बेकाबू ना होता।

 

©उत्कृष्ट शुक्ला



Vote Add to library

COMMENT