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@dawriter

मेहनत कश शहज़ादी।

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छोड़ो जाओ, कौन कहाँ की शहजादी???

शहज़ादी के हाथ मे छाले होते हैं?"

फरिहा नक़वी का ये शैर उदास करता है मगर इस कि खास बात ये है कह जब इसे पढ़ा जाए तो एक दिल कुरेदने वाला मंज़र सामने आता है, जैसे एक सावली सी ईंटों के भट्टे में काम करने वाली मज़दूर लड़की, अपने अल्हड़ आशिक़ के साथ उसके कांधे से सर टिका कर चांद की मधुर रोशनी के तले बैठी, थकन से चूर किसी सम्त टकटकी बाँधे देख रही हो।

जो अपने आशिक़ की जानिब से शहज़ादी का तमगा दिए जाने पर एक मायूसी भरी मुस्कान के साथ अपने जले हाथ दिखा कर कह रही हो
"शहज़ादी के हाथ मे छाले होते हैं???"

रेहान सह्यून, मुंबई

Image Source: dnaindia



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