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@dawriter

माँ मुझे आना है .....

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nehabhardwaj123 by  
nehabhardwaj123

माँ ! मुझे आना है....स्पर्श , तुम्हारा ! पाना है .....
लॉरी सुनते सुनते ही सीने पर सो जाना है...।
अपने नन्हे नन्हे कदमों से क़दम मिला कर चलना है....
थोड़ा तुतलाना , थोड़ा मुस्कुराना है....
माँ मुझे तो आना है.....।
किस्से , कहानियाँ दादी नानी से सुनना है....
छोटे - बड़े भाई बहनों से भी तो मुझे लड़ना है...
रोज शाम कॊ पापा से घूमने की जिद भी करना है....।
माँ मुझे तो आना है......।
रात के अँधेरे साये से डर कर आँचल मे तुम्हारे छुपना है....।
पढ लिख कर नाम सबका रोशन करना है....।
पर...
मैंने ऐसा क्या किया ?...जो तुमने जन्म मुझे दिया नहीँ....।
क्या ? ऐसा अपराध हुआ था.... ।
माँ ! मुझसे अनजाने मे.....
पर...मै तो आना चाहती थी.... माँ !
स्पर्श तुम्हारा पाना चाहती थी..... माँ !
या , शायद ! डर गयी... तुम भी , समाज़ मे बढ़ते अपराधो से....।
कोई कहीँ मुझको भी ना छू ले अपने गंदे हाथों से.....।
या फ़िर मेरी शादी के दहेज से तुम इतनी परेशान हुई....।
तुम्हे लगा ! मुझे वो मुझे तिल - तिल कर मारेंगे.... ।
शायद ! यही सोचकर तुमने मुझे होने से पहले ही मार दिया.....।
और तुम्हे लगता है..... तुमने मुझ पर ये उपकार किया.....।
उपकार होता ! तब मुझ पर....
जब मुझे सशक्त बनाती , पढाती - लिखाती , स्वयं की रक्षा करना भी सिखाती ।
धराशाई कर देती मै उठने वाली हर आँधी कॊ.....
अपनी रक्षा खुद करती मै.. अगर मुझे तुम जीने देती ॥
अगर तुम्हारे जैसे नानी ने भी सोचा होता , मार दिया होता तुम्हे..... जन्म तुम्हारा ना होता ।
एक बार तो नानी से भी तुमने ये पूछा होता....। कैसे ?....उन्होने जन्म दिया तुम्हे ।
तुम्हे कैसे था ?...पाला पोसा !
क्या सब इतना मुशकिल था.... जो तुमने मेरा खून किया ।
पर..
मै तो जीना चाहती थी.... माँ !
स्पर्श तुम्हारा पाना चाहती थी.... माँ !
क्यों ?... तुमने ये पाप किया ।
क्यों ?.....मेरा जीवन छीन लिया ॥
एक बेटी जो जन्म ही ना ले पायी....।



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