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@dawriter

बातें कुछ तुम्हारी.......!!

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ksingh777 by  
ksingh777

इस चाँदनी रात में भी चाँद छुपा-2 सा क्यूँ है,
कहीं चाँद को तुमसे अभी तक मुलाकात नहीं हो पायी है क्या ,
ये मौसम इतना सुहाना क्यूँ हो चला है ,
कहीं तुमने श्रंगार कर लिया है क्या ,
ये भौंरे तुम्हारे घर की ओर क्यूँ मुड़ रहे हैं ,
कहीं तुम घर से बाहर आयी हो क्या ,
ये मेघ बरस क्यूँ रहे हैं ,
कहीं तुम भीग रही हो क्या ,
और इस तेज बारिश में कही तुम्हारे होठों की
लिपस्टिक और आँखों का काजल धुल गए हैं क्या,
ये रातें इतनी हसीन क्यूँ लग रही है,
कहीं तुम मुझे अपने ख्यालों में निहार रही हो क्या,
ये आज मेरे कलम में तुम्हारे नाम का नशा क्यूँ चढ़ा है,
कहीं तुम सपनो में मेरा नाम गुनगुना रही हो क्या, !!



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