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@dawriter

परख

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jhalak by  
jhalak

 

निगाहों में जमाने की परख लिए फिरते हैं,
कौन कैसा है इसकी भनक लिए फिरते हैं,
यूं तो हताश नहीं होते अमूमन लोग हमसे,
फिर भी मुंह में राम और बगल में छुरी लिए फिरते हैं,

                      - झलक

 

 



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