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@dawriter

दो नैनों की बात कई

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jhalak by  
jhalak

 

 

ना बनना दो नैनों के जैसे,देखते हैं पर सोचते नहीं,

फिर भी बिना बात के रोते हैं,कुछ कहने से चुप होते नहीं,

यूं तो अंग-अंग की व्यथा कई ,पर कहने से कुछ होता नहीं,

समझने पर तो सब कुछ है,बिना समझे तो कुछ भी नहीं... 

                           -झलक

 

 

 



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