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@dawriter

दोस्त

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utkrishtshukla by  
utkrishtshukla

 

 

जब भी देखता हूं कहीं मैखाना,
आता है याद वो गुजरा जमाना,
जब मौसम था सुंदर और सुहाना,
काश कोई फिर छेड़ दें वो तराना,
खुदा फिर एक बार सबको मिलाना।


यारों फिर वही महफिल लगाना,
फिर वही शमां-ए-चिराग जलाना,
यारों फिर वहीं महफिल सजाना,
याद करेंगे साथ वो गुजरा जमाना,
खुदा फिर एक बार सबको मिलाना।


फिर बनाएंगे महफिल-ए-मैखाना,
वापस आएगा वो गुज़रा ज़माना,
फिर छेड़ेंगे पुराना वहीं तराना,
यारों फिर वही गीत गुनगुना,
खुदा फिर एक बार सबको मिलाना।

 

 उत्कृष्ट शुक्ला
#utkrisht (copyright)

 

 



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