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@dawriter

दीया

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लौ हूँ हर बार बुझकर गल रहा हैं।

रातों के अंधेरे में हरपल चल रहा हैं।

रोशन करने वाला दीया ही जानता हैं-
कि वो कैसे सभी के लिए जल रहा है।



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