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@dawriter

दरकते एहसास

0 42       
nis1985 by  
nis1985

 

निशा की कलम से.....

दरकते एहसासों को एक साँस मिल गयी,
तुमसे मिलन की फिर आस बढ़ गयी.....

हृदय व्याकुल हुआ तेरे दिदार को,
स्तब्ध निशा में भोर की किरण खिल गयी....

नैनों में मेरे बस स्वप्न है तुम्हारे,
अधरों पे फिर से मुस्कान बिखर गयी.......

आ जाओ पास आके मेरा अंतर्मन महका दो,
फिर से इन होंठो को नमी मिल गयी......

आलिंगन कर तुझको महसूस कर लूं,
सांसो को फिर वही रफ्तार मिल गयी......

रफ्ता-रफ्ता फिर धड़कन हुई मद्धम,
हृदय में आकर जैसे शून्य हो गयी....

पलकों में अपनी बसा के तुमको,
स्वप्नों के जहा में फिर से गुम हो गयी....

दरकते एहसासों को एक साँस मिल गयी,
तुमसे मिलन की फिर आस बढ़ गयी.....

निशा रावल
बिलासपुर



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