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@dawriter

जो मेरे बाल बिखरने नहीं देती थी कभी

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फिर जूनून ख़ेज़ उठे हैं की सहर आएगी

चंद लम्हें हवाएं हैं, गुजर जायँगी

 

जब तेरे नूर से चमकेगा ये आलम एक दिन

चाँद तारों की ये मस्ती भी उतर जाएगी

 

जो मेरे बाल बिखरने नहीं देती थी कभी

मुझ को इस हाल में देखेगी तो मर जाएगी

Rehan Sehyun. Mumbai.



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