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@dawriter

जो नहीं है, वह खूबसूरत है...

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हम ने जाना, तो हम ने ये जाना,

जो नहीं है वो खूबसूरत है।

पाकिस्तानी शायर या यूं कहें कह ज़ाहिरी तौर पे पाकिस्तानी मगर दिल से हिंदुस्तानी शायर जॉन एलिया का ये शैर अपने आप मे ज़िन्दगी की सब से बड़ी उलझन का हल है, उलझन जिसे ख्वाहिशात कहा जाता है।

सारे फ़ितने ख्वाहिशों के ही तो है! हम जैसे ही होश संभाला अपने पापा से साईकल की ख्वाहिश ज़ाहिर की, फिर एक अच्छी साईकल की, फिर हम ने कहीं देखा कह फलां लड़का गियर वाली साईकल चला रहा है, हम वो भी लेना चाहा मिल भी गयी।

फिर हम बड़े होते गए, हमारी ख्वाहिश भी बढ़ती गई। अब हम ने चाहा के मोटर साईकल लेले, ले ली। अब! अब क्या! फिर वो ही भषण!! अब हमें कार चाहिए! अगर कार नहीं मिली तो हम दुखी हो जाएंगे, और अगर मिल गयी तो हम इस कार से अच्छी कार की ख्वाहिश करेंगे!! ये थमने वाला नहीं है।

सिर्फ मिसाल है कार की! ये बात लड़की, गर्लफ्रैंड बंगला, इज़्ज़त शोहरत सब पे फिट बैठती है।

कभी सोचा है ये सब क्या है! हम क्यों है ऐसे! हमे जो मिल जाता है हम उस से और आगे की सोचते हैं, जो नहीं मिलता उसे के बारे में सोच सोच के अपनी ज़िंदगी की ऐसी की तैसी कर लेते हैं, और एक मुर्दार ज़िन्दगी जीने लगते हैं।

तो भय्या आप ने सोचा या नहीं सोचा ये तो पता नही मगर शायर जॉन एलिया ने इस गंभीर मसले पे सोच के इसका निष्कर्ष ये निकाला कह

'हम ने जाना, तो हम ने ये जाना, जो नहीं है वो खूबसूरत है'

यानी जो आप के पास नहीं है बस वो ही खूबसूरत, अगर आप ने उसे हासिल कर लिया, तो फिर वो खूबसूरत नहीं रह जाएगा।

इसलिए ख्वाहिशात के बंधी मत बनो। किसी मस्त मौला की बात ध्यान में रखोे

'ऊपर वाले कि भीक, जितनी मिली ठीक'

लेखक: रेहान सह्यून

Image Source: Google Play



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