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@dawriter

गुमगश्त सी खामोशियाँ

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nis1985 by  
nis1985

 

निशा की कलम से......

चलो एक ऐसे जहाँ, जहा बस सुकूँ मिले,
करके आलिंगन तुम, मिटा दो सारे गिले......

कोई ना हो दरमियां,बस धड़कनो की रफ्तार हो,
बनके बून्द बारिश की, बस तू मुझमे घुले......

मेरे अक्स में तू, तेरे वजूद में बस मैं ही रहूं,
गुमगश्त सी खामोशियों का,कारवां बस यूं ही चले.....

चलो एक ऐसे जहाँ.....!!!!

निशा रावल (फ्रीलान्स राइटर एन्ड पोएट)
बिलासपुर छत्तीसगढ़



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