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@dawriter

कुछ पंक्तियां

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ग़म का साथी शराब है
और तन का साथी शब़ाब।

मुकम्मल मोहब्बत की चाह में
सब लुट गए इसी राह में।

मेरे वजूद की कहानी है मशहूर
वो मुझसे दूर मैं खुद से दूर।

वह मरना चाहता है

उसे जीने का तजुर्बा है।

अगर मन काबू होता
तो दिल बेकाबू ना होता।

तवज्जो दी होती उसने पहले अगर
न बैठती मेरी कब्र पर यूं सज संवर।

 

©उत्कृष्ट शुक्ला



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