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@dawriter

ओ गणपति महाराज

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nis1985 by  
nis1985

निशा की कलम से...

ओ गणपति महाराज
विनती सुन लो आज
अकिंचन सी मैं खड़ी
आज तेरे द्वार
स्थूल बुद्धि, मूढ़ मैं
हु थोड़ी नादान
मेरी त्रुटियों को दूर करो
अनुरोध करू बारम्बार
ओ गणपति महाराज
विनती सुन लो आज......!!

नित नए सोपानों पे चढू
अपरिमित की न मुझको आस
मेरी उत्कंठा को दूर करो
विनती करू मैं बार-बार
भटक जाउ गर मार्ग से
थाम लो मेरा हाथ
ओ गणपति महाराज
विनती सुन लो आज.....!!

आपके मण्डित रूप से
रोम- रोम जागृत हुआ
आप ही भक्तवत्सल
रिद्धि सिद्धि आपकी प्रिया
कृपा करो हे गजानन
करू न कोई भूल
चरण वंदन करू आपका
मैं चरणों की धूल
ओ गणपति महाराज
विनती सुन लो आज......!!!

निशा रावल

बिलासपुर



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