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@dawriter

इच्छा

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इच्छा पानी का बुलबुला पल मे उठे, मिट जाये
फिर सारी जिंदगी क्यो इसमे सिमट जाये।

उठी जो इच्छा मन मे मनके सी,नागिन सी बन जाये
पल पल डसे ये तुझको मानव,तन से लिपट जाये।।
जीना मुश्किल कर दे फिर ये ,हर पल बढती जाये।
मन पर रहे जो काबू ना तो,सर पर ये चढ जाये।
पागल कर दे फिर तूझको ये,हर पल तुझे सताये।।
एक बार जो बीज इच्छा का,मन मे पड़ जाये
अमरबेल की लता सरीखा तन को खाती जाये।
बैचेनी सी रहे  जीवन में, हर पल ये तड़पाये।
जो चीजे ना मिली हमें,ये उनके लिये तरसायें
बड़े जतन से अगर कही एक इच्छा पूरी हो जाये।
तब भी मिले ना चैन इस मन को,दूजी फन फैलाये।।
जीते जी ना मन संतुष्ट हो,ना पूरी हो इच्छाएं
जीना है गर तुम्हे चैन से ,मन पर काबू पायें।



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