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@dawriter

अंधी दौड़

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याद रख, तू अंत समय पछताएगा।

अपनों से नाता तोड़ तू
कभी खुश न रह पाएगा,
क्या करेगा उस वक्त तू
जब अकेला रह जाएगा,
याद रख, तू अंत समय पछताएगा।

 

पैसों के पीछे भाग तू
रिश्ते निभा न पाएगा,
कम कर अपनी जरूरतों को
वरना दौड़ता मर जाएगा,
याद रख, तू अंत समय पछताएगा।

 

करोड़ों बटोर ले अभी तू
कफ़न में जेब न पाएगा,
ले जा पाएगा कुछ नही
सब यहीं धरा रह जाएगा,
याद रख, तू अंत समय पछताएगा।

 

खूब घूम ले कारों में तू
चार कंधों पर ही जाएगा,
कुछ ख़्याल कर अपनों का
वरना चार कंधे भी न पाएगा,
याद रख, तू अंत समय पछताएगा।

 

खूब खरीद ले जमीनों को तू
बस दो गज हिस्से पाएगा,
पंच तत्वों से बना शरीर
पंच तत्वों में मिल जाएगा,
याद रख, तू अंत समय पछताएगा।

 

उत्कृष्ट शुक्ला

#utkrisht (copyright)

 



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