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@dawriter

Thoughts of an infant

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एक गर्भवती गयी रुग्णालय कराने गर्भ की जाँच,
इतने में ही ही गर्भ से,
आई एक आवाज़,
"लड़की हूँ मैं माँ, हाँ माना तुम्हारा ही अंश हूँ मैं,
पर हूँ न भाई सी काबिल,
न काबिल हूँ बढ़ाने खातिर तुम्हारा वंश मैं,
हूँ भीतर,पर हालात देख बाहर के,
जाती हूँ डर मैं,
न आने देना बाहर मुझे तुम,
मार देना उदर में।
कहना जाकर बापू से तुम,
न है जरूरत घबराने की,
न करें चिंता किसी बात की,
न आएगी नौबत गिड़गिड़ाने की,
न होंगी मैं, न दहेज होगा, न होगा सौदा वो मेरा,
हो सके तो बिन दहेज ही,
बाँधना भाई को भी सेहरा,
देखा, है फायदे मेरी मौत के,
तुम अब व्यर्थ न रोना,
मुस्कुराओ माँ, अब हर रात चैन से सोना,
पता है, मैं जग रही थी, पिछली रात को,
सुना था मैंने भी, बापू और तुम्हारी बात को,
सच कहूँ तो रो पड़ी थी, जब होकर मायूस बोले थे वो,
गर लड़की हुई, तो कैसे पैसे का जुगाड़ होगा,
न होंगी मैं, न फैलाना हाथ,
न किसी का उधार होगा,
देखा है फायदे मेरी मौत के,
देना पड़ता तुम्हें, "घर गाड़ी मोटर", होती अगर मैं,
तभी हूँ कहती,
न आने देना बाहर मुझे तुम,
मार देना उदर में।
तुम तो खबरें सुनती हो माँ,
क्या होता है औरत के साथ में,
कितने अय्याश खुले फिरते हैं,
सड़कों पर आधी रात में,
अंदर हूँ न, इसलिए बची हूँ,
गर जाना पड़ा कभी अकेले संसार मे,
ये हैवान, बाँट के,
खा जाएंगे मुझे नोच छीन फाड़ के,
देखा है फायदे मेरी मौत के,
बचेगी इज़्ज़त घर की,
नाक कटेगी सो अलग, शर्म से झुक जाएगा सर भी,
कितनी ही नज़रें उठेंगी मुझपर,
उतारने कपड़े मेरे तन से,
नग्न तस्वीर बनेगी मेरी,
न जाने कितने ही मन में,
जैसे हो रहा है हर रोज़, वैसे ही किसी रात,
होगा बलात्कार मेरे भी साथ,
और वैसे ही न्याय की खातिर,
भटकूँगी दर-बदर मैं,
हूँ भीतर पर हालात देख बाहर के,
जाती हूँ डर मैं,
तभी कहती हूँ,
न आने देना बाहर मुझे तुम,
मार देना उदर में।

#stopsexualabuse
#saynotoforcedmarriage



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