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@dawriter

​नमन है तुम्हें

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यहाँ एक पति है एक पत्नी है और साथ में है पति का अपनी पत्नी के लिए आदर, जिसे वो अपने शब्दों में कुछ इस तरह बांधता है । 

 
प्रेम के उस आखरी पड़ाव पर 

जहाँ शरीर अपना अंश बहा कर 

पड़ जाता है निढाल हो कर 

जिस क्रिया में दो देहें मिल कर 

तैयार करती हैं तीसरी देह को 

जो प्रेम का अंतिम चरण माना जाता है

उस चरण में जब तुम होती हो 

मेरे सामने शरमाई सी सकुचाई सी 

तब जो मैं चुमता हूँ तुम्हारा माथा 

वो सिर्फ एक चुंबन नहीं होता 

वो होता है नमन ठीक वैसा ही 

जैसा लोग अपने ईश्वर के आगे 

हाथ जोड़ कर हाथ फैला कर या 

अन्य तरह से करते हैं उनके सामने 

उस वक्त तुम होती हो मेरे लिए 

ईश्वर का सजीव स्वरूप 

जातनी हो क्यों ?
क्योंकि जिस इज्ज़त को तुमने

अपने प्राणों से ज़्यादा संभाल कर रखा

तुमने एक अधूरे शब्द “प्रेम” के नाम पर 

मुस्कुराते हुए मेरे सामने रख दिया 

खोखले नियमों के अनुसार स्वामी हूँ मैं तुम्हारा 

चाहूँ तो तुम्हारे ना चाहने पर भी 

खेल सकता हूँ तुम्हारी देह से 

और तुम्हें एक शब्द बोलने का 

अधिकार भी ना होगा 

बस तुम देखोगी मुझे 

अपने तन को नोचते हुए 

जैसे देखती आ रहीं हैं 

अधिकांश औरतें सदियों से 

मगर मैने तुमसे प्रेम किया है 

और जानता हूँ ये अच्छे से कि 

इतना आसान नहीं होता किसी 

ऐसे के सामने निवस्त्र हो जाना 

जिसे तुमने महज़ कुछ सालों से 

कुछ महीनों या कुछ दिनों से जाना हो 

अगर ऐसा हो तो ये महज़ वासना 

भर रह जाएगा इसमें प्रेम रत्ती भर 

ना दिख पाएगा 

मगर मुझे गर्व है इस बात का 

कि मैने उन क्षणों में तुम्हारी आँखों 

में तैरता हुआ प्रेम देखा 

दर्द में भी तुम्हारे चेहरे पर संतोष देखा 

मैने देखा तुम्हारा मेरी तरह पूर्ण होना 

और यही वजह है कि हम उस 

शारीरिक क्रिया के दौरान 

वासना में ना हो कर प्रेम में थे 
तुम्हें नमन करता हूँ नतमस्तक हो कर 

तुमने मुझे अपनी बहुमुल्य संपदा के काबिल समझा

तुमने मुझ पर विश्वास दिखाते हुए 

अपना सर्वस्व मुझ पर लुटाया 

तुमने मुझे प्रेम के अंतिम पड़ाव 

को प्रेम से पा लेने का अवसर दिया 

तुमने मुझे अपनी आत्मा में समा कर

मेरी आत्मा हो जाना स्वीकारा 

इन सब के लिए नमन है तुम्हें
पत्नी की आँखों में आँसू हैं ऐसे आँसू जो बता रहे हैं कि आज उसका वो डर मर चुका है जो डर उसे अपने भविष्य के जीवन साथी को ले कर लगा करता था जो डर उसे खुद से अपना जीवन साथी चुनने के वक्त लगा था । पत्नी अपने पति द्वारा प्रकट इन आदर भरे शब्दों को इस वादे से स्वीकार करती है कि वो जल्द ही अपने भाव भी उसके सामने रखेगी । 
धीरज झा



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