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@dawriter

यही तो इश्क है-२

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nis1985 by  
nis1985

निशा की कलम से.....
यही तो इश्क है भाग-२

अब मन्दिरी की जिंदगी पूरी तरह से बदलनेे वाली थी, उसके जीवन मे भी इश्क की बहार आने वाली थी, और ये सिर्फ और सिर्फ आनंद की वजह से!

लेकिन ये इतना आसान भी नहीं था पता है क्यों, क्योंकि आनंद मन्दिरी के स्वभाव के बिल्कुल विपरीत था, आनंद बहुत ही ज्यादा चंचल, और हसी ठिठोली करने वाला था और पता हैं आनंद के सपनो की राजकुमारी तो हमेशा से ही माथे पे बिंदिया लगाने वाली,चुड़िया पहनने वाली, झुमका पहनने वाली, पैरो में पायजेब पहनने और आंखों में काजल लगाने वालीं थी, जी हाँ आनन्द ऐसी ही लड़की के सपने देखा करता था!

लेकिन मन्दिरी को देखते ही न जाने उसे कौन सा झटका लगा, उस पर लट्ट हो गया आनंद, अब तो वो दिन-रात यही सोचता रहता, और मन ही मन मुस्काता रहता कि मेरी मन्दिरी ने जब सादगी में ही मुझपे इतना जादू चला डाला, तो वो जब दुल्हन बनेगी तो मुझे सम्भालेगा कौन? हाय! मैं तो उसे देखते ही गिर पडूंगा,और जब वो कानों में झुमके, माथे पे बिंदी, हाथो में चुड़िया, और आंखों में काजल लगाएगी तो कसम से मेरा तो जीना ही मुश्किल हो जाएगा, बस यही सोचते-सोचते आनंद मुस्कुरा रहा था और मन्दिरी को फोन करने की सोच रहा था, सच आनंद और उसके घर वाले तो बहुत ही ज्यादा खुश थे मन्दिरी को पाके....!

सुबह होते ही आनन्द ने मन्दिरी को फ़ोन लगाया,,

''"' हेलो मन्दिरी कैसी हो,,

""हम्म मैं ठीक हु और आप,,,

""मैं भी ठीक हु आनंद ने जवाब दिया...

""अच्छा सुनिए मेरे कॉलेज जाने का टाइम हो रहा है लास्ट ईयर है तो सोच रही हुँ अच्छे से पढ़ाई कर लूं तो मैं शाम को बात करूँ आपसे, मन्दिरी ने आनंद से आग्रह किया!

""अच्छा ठीक है पर फ़ोन रखने से पहले मेरी एक बात का जवाब दोगी मन्दिरी????

""ह्म्म्म बोलो न क्या बात है

""मन्दिरी क्या तुम इस शादी से खुश हो, मैं तुम्हे पसंद तो हुँ न मन्दिरी, क्योंकि मैं तुमसे प्यार करने लगा हुँ और तुम्हे सारी खुशियां देना चाहता हूँ, घरवालो ने शादी तो हमारी तय कर दी पर मैं तुम्हारे मुँह से एक बार सुनना चाहता हुँ...

""मन्दिरी हसने लगी और बोली, तुम इतने सेंटी क्यों हो रहे हो, हा मैं खुश हूं बहुत मेरे पापा ने जो तुम्हे चुना है,और सुनो मुझे कॉलेज के लिए बहोत देर हो रही है शाम को बात करूँगी...

""मन्दिरी,मन्दिरी प्लीज एक मिनट फोन मत काटना

""अरे बाबा अब क्या है बोलो...

"" मन्दिरी तुमने मुझे चुना है कि नहीं, या बस तुम्हारे पापा ने आनन्द ने उदास होकर पूछा...

""अरे बाबा तुम बहोत परेशान करते हो, देखो अगर ऐसे ही सवाल पूछते रहे तो सोच लो, मुझे तुमसे शादी-वादी नहीं करनी, और मन्दिरी ने जोर से हँसते हुए फोन कट कर दिया, आनन्द चुपचाप सा हो गया और मन्दिरी के एक प्यार भरे उत्तर की बस आस देखने लगा...!!!!!

क्या आनंद मन्दिरी को बदल पायेगा अपने सपनो की राजकुमारी की तरह??????

आखिर कभी तो मन्दिरी आनंद के इस अपरिमित प्रेम के रंग में डूबेगी क्योंकि यही तो इश्क़ है...!!©

【क्रमशः】
निशा रावल
बिलासपुर

यही तो इश्क है-१

यही तो इश्क है-३

यही तो इश्क है भाग-४

यही तो इश्क है भाग-५

 



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