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@dawriter

अरे सी -सेक्शन कोई बड़ी बात नहीं..

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anonymous dawriter by  
Anonymous

माँ बनने के सुखद एहसास से शायद ही कोई औरत दूर रहना चाहती है। माँ बनना औरत के अस्तित्व को पूरा कर उसको एक नयी पहचान देता है। कहते हैं कि औरत अपने सिर पर कफन बाँधकर अपने शरीर में से एक नयी जान को जन्म देती है,वह नहीं जानती की अगले ही पल क्या हो जाएगा और ऐसी कितनी ही घटनाएं सामने देखने को मिलती हैं जोकि बहुत दुःख दायी एहसास देती है। अब चाहे बच्चा नॉर्मल डिलिवरी से हो या फिर सी- सेक्शन से, खतरा तो दोनों में ही रहता है। हमे दोनों का ही सम्मान करना चाहिए, लेकिन आज के समय में ज्यादातर यही देखने में आ रहा है कि अधिकांश औरतों की डिलीवरी सी- सेक्शन के द्वारा होती है। मै खुद एक माँ हूँ और मेने भी सात साल पहले सी – सेक्शन के द्वारा ही बेटी को जन्म दिया था। वो दर्द मै महसूस कर सकती हूँ लेकिन यह पीड़ा तो समय के साथ साथ व बच्चे के साथ बिताए हुए हर खुशनुमा पलों के साथ उड़न छू् हो जाती है। लेकिन एक बड़े ही अफसोस की बात जो आजकल सुनने में आती है कि सी- सेक्शन से बच्चे को जन्म देना बड़ा ही आम बात बन गयी है। सी सेक्शन से जन्म देकर घर की बहु के माँ बनने के बाद सासू माँ उसके इस फैसले पर शाबाशी देने की बजाय यह कहना ज्यादा पसंद करती है कि चलो जी आसानी से जान छूटी, नॉर्मल बच्चे पैदा करने के लिए लेबर पेन लेने की हिम्मत नहीं थी इसमें बताओ यह कोई बात हुई ।

कौन सी लड़की अपने शरीर में चीर फाड़ करवाना चाहेगी???? रसोई घर में अगर चाकू से हाथ कट जाए तो शायद चार दिन तक घाव बना रहता है तो सी-सेक्शन में तो पेट काटा जाता है। तो वह घाव इतनी ‌जलदी कैसे भर सकते हैं। यह सब जानते है कि सिजेरियन डिलीवरीव के बाद रिकवरी करने में काफी टाइम लग जाता है, एक अच्छी हेलदी डाइट देनी पड़ती है। लेकिन आजकल शायद वो‌ नामुमकिन सा बनता जा रहा है। बस बच्चा‌ पैदा हुआ नहीं कि 11 वे दिन लगा दिया जी काम पर यह कहकर कि बहुत हो गया आराम, हमारे समय पर तो बिलकुल आराम नहीं मिलता था। हमने इतने दिन निकाल दिए अब संभालो घर….. क्या यह तरीका सही है। बस अपना टाइम की चर्चा कर करके आज के समय में अपनी जिम्मेदारियों से पीछा छुड़ाने का सही तरीका अपनाया जाता है, उसको इतना सुनाना कि वह अपने आत्मसम्मान बनाये रखने के लिए स्वयं ही उठ कर घर के काम काजों में लग जाती है और फिर सारी जिन्दगी के लिए बीमारियां लगा बैठती है और जब तक मायके जाने का वक्त आता है तब तक उसका काफी शरीर का नाश हो चुका होता है।

एक बात और करना चाहूँगी कि सी- सेक्शन के बाद यह कहना कहाँ तक उचित है कि इसमे हिम्मत ‌ही नहीं थी कि ये लेबर पेन ले सके क्योंकि इसकी माँ ने कुछ नहीं खिलाया पिलाया ढंग से तभी कमजोर है फिर क्या भेज दिया जाता है उसको उसकी माँ के घर ताकि जापे के चालीस दिन माँ ही निकाले। अब शादी के बाद लडकी जिम्मेदारियां ससुराल की निभाए और जब उसको खुद जरूरत पड़े तो जाए अपने माँ बाप के घर। वो अब आपके घर का हिस्सा है व आपके घर के वंश को आगे बढ़ाती है न कि अपने माँ बाप के, उसके प्रति आपकी भी कुछ जिम्मेदारियां है कृपया करके उन जिम्मेदारियों को निभाये व साथ साथ अपने बेटे को भी अपनी पत्नी की इस अवस्था में उसके स्वास्थ्य के प्रति जागरुक बनाये क्योकि वो भी पिता बना है। ऐसी अवस्था में एक हेलदी डाइट की आवश्यकता होती है जोकि पहले दिन से ही डाक्टर द्वारा बतायी जाती है। उसके खाने पीने का स्वयं ध्यान रखे ना कि जो खाना है खुद खालो कहकर अपनी जिम्मेदारियों से जान छुड़ाओ, वो भी किसी की बेटी है व अब आपके घर का हिस्सा। उसके इस दौर में उसका सम्मान करे व सिजेरियन द्वारा डिलिवरी होने पर आम बात न कहकर उसका शारिरिक व मानसिक तौर पर उसका हौसला बढ़ाएं …… धन्यवाद ।

‌मोना ‌कपूर



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