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@dawriter

कुलटा

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कुलटा

"दीदी जल्दी घर आ जाओ"
"पर हुआ क्या है इतना घबराया क्यों है?"

"फोन पर नहीं बता पाऊँगा बस आप जल्दी चली आओ"

सुबोध का फोन सुन कर सुधा पूरी तरह घबरा गई, क्या हुआ होगा माँ को तो कुछ नहीं हो गया ।
पूरे रस्ते दिमाग में उलझन चलती रही।

"सुबोध ...सुबोध "
"हां दीदी आओ आप"

"क्या हुआ तु इतना परेशान ?"

"माँ तो ठीक है ।"
"माँ के कमरे में चलो दीदी...।"
ःःःःःः कोने में भाभी निर्जीव सी पड़ी थी और माँ सर पर हाथ रखे बैठी थी ।
"क्या हुआ माँ? भाभी भाभी क्या हुआ ?"
~"सुधा ...सुधा मैंने कुछ नहीं करा, मेरा कोई दोष नहीं ...."
"कुलटा कुलक्षिणी तेरा कोई दोष नहीं ?
झुठी मक्कार।"गुस्से से माँ चिल्ला कर बोली।
"माँ ..कैसे बात कर रही हो भाभी से "...सुधा गुस्से से बोली ।
"अभी कर्मो का नहीं पता तुझे, क्या गुल खिलाया इसने ।"
"कुछ बताओगे हुआ क्या है ?"
"वो आया था, इसके साथ शादी का रिश्ता लेकर।"
"कौन?"सुधा उत्सुकता से पूछती है।
"दिवाकर इसका सहकर्मी।"
"सच माँ ।"
"हां, पता नहीं कब से दोनों का चक्कर चल रहा है, चरित्रहीन कुलटा ".....छी......

"मेरा विश्वास करो सूधा मै कुछ नहीं जानती, तुम्हारे भैया के जाने के बाद तुम सब मे जीवन को ढुंढा हैं "
"भाभी कुछ मत कहो आप, मुझको तो दुख इस बात का है कि माँ ने आपकी तपस्या औऱ त्याग को नहीं देखा एक छन मे कुलटा बोल दिया, माँ बन के संभाला आप ने हमें सफल बनाया माँ का ध्यान रखा इतना तो भैय्या भी नहीं कर पाते,"
"आप तो मेरी आत्मा हो भाभी औऱ मुझको दिवाकर जी के रुप मे बड़े भाई मिल जायेंगे "
"माँ आपने खुद विधवा का जीवन जीया है, भाभी आँखों का सुना पन क्यों ना देख पाई ।"

"क्या बकवास कर रही है सुधा तू , दिमाग ठिकाने है, समाज के कुछ नियम है वो निभाने होते हैं।"

"कौन से नियम माँ '"सुबोध बोला।

दस साल से भाभी ने हमें संभाला, बच्चों की तरह प्यार दिया, वो समाज को नहीं दिखाई दिया और एक पल में आप ने भाभी को चरित्रहीन कह दिया।"

"क्या बोल रहे हो मतिभ्रष्ट हो गई क्या "

"नहीं माँ मति को सदगति प्राप्त हुई हैं

चल सुबोध अपनी बहन के विवाह की तैयारी करें और भाभी हमेशा की तरह हमारी ये इच्छा भी पूरी करेगी।"
अचंभित सी मालती सुनती रह गई वो प्रसन्न हो या दुखी वो समझ नहीं सकी


दिव्या राकेश शर्मा

देहरादून

Image Source: thecheckernews



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