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@dawriter

बहनों की दखलंदाजी कितनी सही?

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नेहा की शादी तनुज से कुछ समय पहले ही हुई है। नेहा कुछ खुले विचारों की होने के साथ-साथ मिलनसार भी है। वो हर किसी से जल्दी घुल मिल जाती है। तनुज बैंक में काम करता है और अक्सर व्यस्त ही रहता है। वैसे तो नेहा के नए घर में सास, ससुर, तनुज और वो खुद ही रहती हैं लेकिन पास में ही घर होने के कारण उसकी ननद रीमा का आना जाना भी काफी रहता है। शुरुआत में तो नेहा को रीमा का आना जाना अच्छा लगता था लेकिन धीरे-धीरे ये सब उसके लिए सरदर्दी बन गया था।

रीमा रोजाना सुबह अपने पति को ऑफिस भेजने के बाद उनके घर आ जाया करती। सास भी सारे दिन उसके साथ यहां वहां की बातें करती रहती और नेहा उनके आदर सत्कार में लगी रहती। लंच से लेकर शाम को डिनर तक रीमा वही होती और पति का डिनर भी पैक करवा कर ले जाती। इतना ही नहीं उसकी सासू माँ बाजार का सारा काम भी रीमा से ही करवाती। जब कभी नेहा कोई बाजार का काम बताती तो सासू माँ उसे बोलती - 'बेटा तुम्हें इस शहर की जानकारी कहाँ है? रीमा ही कर के ले आएगी तुम्हारा जो भी काम है। इसी को बता दो! ' नेहा ये सब सुनकर अपना सा मुंह लेकर बैठ जाती। कभी तनुज को बोलती तो वो भी व्यस्त होने का बहाना लगा कर रीमा से ही बात करने को बोल देता।

यह सब तो अब रोज का ही हो गया था। नेहा को अब रीमा का रोज का आना और घर के मामलो में दखल देना कुछ खलने लगा था। ऐसा नहीं था कि उसे रीमा से कोई दिक्कत थी, लेकिन उसका इस तरह का व्यवहार ही नेहा के मन में उसके प्रति आदर को कम कर रहा था। घर का हर छोटा- बड़ा फैसला भी रीमा से पूछ कर लिया जाता और नेहा की कोई राय भी लेना जरूरी नहीं समझता था।

यहां तक कि अगर घर का राशन भी लाना होता तो रीमा को ही लिस्ट लेकर सुपर मार्केट भेजा जाता था। जब कभी तनुज कहीं बाहर जाने का प्लान बनाते तो भी रीमा को साथ ही ले जाते। नेहा सभी की इस अनदेखी से बहुत दुखी रहने लगी थी। रीमा का शादीशुदा होने के बाद भी अपने घर को संभालने से ज्यादा मायके की जिम्मेदारियों को उठाना, नेहा को सही नहीं लगता था। जो जिम्मेदारी नेहा की होनी चाहिए उनको भी रीमा ही निभा रही थी। नेहा के निजी जीवन में उसको कोई भी फैसला लेने का अधिकार नहीं था। इन सब से उसका मन धीरे धीरे कड़वाहट से भरने लगा।

मैं इस कड़वाहट की जिम्मेदार रीमा को ही मानतीं हूँ। मैं कभी भी ये नहीं कहूंगी कि बेटियों की शादी के बाद उनका घर के फैसलों में अपनी राय देना गलत है या मायके आना-जाना गलत है। लेकिन मैं समझती हूँ कि बहनों को शादी के बाद कुछ चीजों से बचना चाहिए। क्योंकि जब तक हम अपने को अलग नहीं करेंगे तब तक हमारी बहुओं को उनका पूर्ण अधिकार नहीं मिलेगा। आपका इतना दखलंदाजी करने से आपका ही आदर कम होगा। जैसे आप किसी के घर में बहु बन कर जाते हो और जितना आदर, सम्मान, अपनापन और हक़ आप अपने लिए चाहते हो, अगर उतना अपनी भाभी को दोगे, तो रिश्तों में सदैव मिठास बढ़ती ही जाएगी। कुछ रिश्तों को मजबूत करने के लिए दूरी भी जरूरी होती है।

आप मेरे विचार से सहमत है या नहीं ? अपनी राय जरूर दें।

Thank you..



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