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@dawriter

लक्ष्मण रेखा

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तुम्हारा मेरा क्या रिश्ता है। सवाल छोटा सा लगता है पर अगर हम सबसे पूछे तो जवाब अनेक और बहुत मिलेंगे। जहाँ हम रहते हैं और जहाँ हम काम करते हैं हर जगह सबसे सबका अलग-अलग रिश्ता है। कुछ रिश्ते हमें जन्म से मिलते हैं, जिन्हें हम जिन्दगी भर निभाते हैं। कुछ बनाते हैं, कुछ बन जाते हैं।

कुछ के साथ निभा पाते हैं। कुछ निभा भी नहीं पाते। इन सब सवालों में उलझी रोशनी न जाने क्या-क्या सोच रही थी। क्या औरत को अपनी लक्ष्मण रेखा पार करनी चाहिए या उसका दायरा अब के समाजिक परिवेश में बदल गया है। रोशनी जो की अपनी पुराने सोच के साथ लड़ रही थी।

रोशनी के मन में एक ही सवाल बार बार गूंज रहा था कि आखिर क्या कमी है उसमे..

हालांकि रोहित भी ये बार बार कहता है कि उसमे कोई कमी नहीं है फिर क्यूँ..

क्यूँ हर बार वो एक नयी औरत के पीछे लग जाता है। वैसे तो ये उसकी आदत थी हर किसी को पहली बार मे ही प्रभावित कर देता था। उसके विपरीत रोशनी जल्दी से किसी से खुल नहीं पाती थी। इस तरह की छोटी-छोटी बातों से रोशनी मन ही मन हीन भावना से ग्रसित हो गयी। उसे कहीं आने जाने का भी मन नहीं रहता वो कहीं भी जाने से कतराने लगी। रोशनी सोचती थी ये औरतें कैसी हैं जो दूसरों के पति के साथ मजे करती हैं क्या उन्हें अपने पति से प्यार नहीं होता.. रोशनी का मन होता कि बहुत सारी गालियाँ देने का। पर उसे याद नहीं आता कि कौन सी गाली दे और किसे दे

कोई एक हो तो रोहित की जिन्दगी मे तो रोज जैसे लाइन से एक के बाद एक आ जाती है। संमुद्र के किनारे बैठी बैठी रोशनी अपने ही ख्यालों में खोयी थी। “मैं अपना बैग कुछ देर के लिए यहाँ रख दूँ क्या? मेरी बेटी को लहरों से खेलना है “अचानक आयी आवाज से जैसे रोशनी चौकी, उसने कहा की हाँ-हाँ क्यों नहीं पर शायद ये पहली बार हुआ हो की रोशनी को ये आवाज़ नयी न लगी वो उस अन्जान को देख रही थी जो बैग रखकर अपनी बेटी के साथ लहरों से खेलने चला गया।

उसे बड़ा अच्छा लग रहा था पानी से खेलते हूए उस अजनबी को देखना, उसका भी मन हो रहा था भीगने का वैसे तो रोहित को भीगना बहुत पसंद है और रोशनी को नहीं और रोहित अकेले ही भीगा करता था। पर न जाने क्यूँ उस दिन रोशनी का बड़ा मन कर रहा था भीगने का शायद वह अपने आँसू को धोना चाहती थी। तभी वह अजनबी आया और रोशनी के पास बैठ गया फिर उसने कहा हाय मैं वरुण हूँ फिर उसने कहा की वह एक कम्पनी में इंजीनियर है बात से रोशनी को लगा की वह एक अच्छी पोस्ट पर है फिर उसने कहा धन्यवाद बैग देखने के लिए और अपनी बेटी को लेकर जाने लगा बोला अब देर करने से इसकी मम्मी नाराज हो जाएगी।

रोशनी ने कुछ नहीं कहा फिर वो भी अपने घर की ओर जाने लगी। आज रोशनी को न जाने क्यूँ बहुत अच्छा लग रहा था। उसने अपना फेसबुक खोला और वरुण नाम खोजने लगी पर उसे टाइटल तो पता नहीं था थोड़ी देर खोजकर उसने छोड़ दिया कि वो तो शादीशुदा है क्यूँ बेकार के काम मे पड़ गयी।

फिर दस पन्द्रह रोज के बाद अचानक एक मॉल मे रोशनी की नजर वरुण पर पड़ी उसे अनायास ही खुशी महसुस हुई लेकिन उसकी हिम्मत न हुई कि वो जाकर वरुण को टोके उसने सोचा वो क्यूँ उसे याद रखेगा एक लम्बी साँस लेकर वो मुड़ गयी तभी उसके पीछे से वरुण आया और बोला कि मैं इतना बुरा भी नहीं की लोग मुझे देखकर मुड़ जाएँ। रोशनी ने आश्चर्य के साथ वरुण को देखा, फिर वरूण ने कहा शहरों मे जान पहचान के लोग जल्दी से नहीं मिलते और हम पन्द्रह दिनों मे फिर से मिल रहे हैं।

रोशनी की समझ मे नहीं आया की क्या बात करे उसने कहा मैं शादीशुदा हूँ तो वरुण हँसने लगा और कहा मैंने कब आपको शादी के लिए प्रस्ताव दिया आप तो बहुत भोली हो दो शादीशुदा अगर आपस मे बात कर ले तो इसका मतलब ये नहीं होता कि उनके बीच कुछ है। आपको पता है रोशनी जी आप इस वक्त काँप रही हैं जबकि मै शक्ल से डरावना नहीं फिर भी मुझे लग रहा है कि मैं डरावना हूँ ठीक है मैं चलता हूँ कहकर वरुण चल दिया। रोशनी वहीं पर बैठ गयीं उसे क्या हो जाता है क्यूँ वो काँपने लगी क्या उसे वरुण अच्छा लगने लगा है क्या वो भी उसी औरतों में से एक हो गयी जो दूसरो के पति पर नजर रखती हैं।

फिर उसने सोचा नहीं नहीं अब वह कभी भी वरुण से बात नहीं करेगी। तभी रोशनी के चेहरे पर एक अन्जानी मुस्कुराहट आ जाती है उसके मन मे जो युद्ध चल रहा था उसके और रोहित को लेकर वो शायद अब कुछ फीका पड़ गया था। रोहित जब घर आया तो रोशनी का खिला चेहरा देखकर बोला आज बहुत खुश नजर आ रही हो चलो आज बाहर खाना खाते हैं। रोशनी ने कहा अगर मुझे कोई मिल जाए तो तुम्हें कैसा लगेगा तो रोहित ने कहा अच्छा ही लगेगा अगर तुम खुश हो तो, चलो कोई मिल गया है तो बुला लो उसे भी वैसे भी कोई तुमसे शादी थोड़ी करेगा।

रोशनी के मन से जैसे बहुत बड़ा बोझ हल्का हो गया हो वो आज तक खुद के बनाए जाल मे उलझती जा रही थी जिससे वो बीमार हो गयी थी। आज उसे लग रहा था कि वरूण ने उसे जीने की नयी राह दिखा दी जिससे उसका आत्मविश्वास वापस आ गया। उसे एक नया दोस्त मिल गया था जिससे उसकी साँसें वापस मिल गयी और उसे मालूम भी नहीं कि वो फिर से वरूण से मिलेंगी या नहीं पर उसे उसकी जिंदगी वापस मिल गयी थी। उसे लक्ष्मण रेखा का जवाब मिल गया था जो उसे खुद तय करना था।

Soni Kedia



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