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@dawriter

सहयोगी पति

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दिया की अभी पढ़ाई पूरी न हुई, पर उसके माता-पिता ने दिया का रिश्ता तय कर सगाई कर दी। अच्छा रिश्ता दिया के मां बाप हाथ से नहीं जाने देना चाहते थे, रवि इंजिनियर और सम्पूर्ण परिवार से था, सगाई तो हो गई पर रवि के कहने पर शादी दिया की पढ़ाई पूरी होने पर ही करने का निश्चय लिया गया।

सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था कि अचानक से हार्टटेक से रवि की मां की मृत्यु हो गई, जिससे रवि का घर अस्त-व्यस्त हो गया क्योंकि रवि की बहन की शादी हो गई थी और वह अपने ससुराल में ही व्यस्त थी, घर की सारी जिम्मेदारी रवि की मां ही निभाती, सबकी छोटी-छोटी जरूरतों का ख्याल भी रखती।

एकाएक रवि की मां की मृत्यु के बाद घर संभालना मुश्किल हो रहा था, ऐसे में दिया और रवि की शादी करने का निर्णय लिया गया पर अभी भी दिया की M.A की अंतिम समेसटर की परीक्षा रह गयी थी, पर रवि के परिवार वालों के जोर डालने पर दिया की शादी रवि के साथ हो गई।

अब दिया को ऐसा लगा कि उसे तो घर की जिम्मेदारियों ही निभानी पड़ेगी, दिया को अपनी पढ़ाई छूटती हुई और सपने टूटते हुए प्रतीत हुए।

शादी की अगली सुबह ही रवि ने दिया को तैयार होकर उसके साथ चलने को कहा, दिया जल्दी से तैयार हो आई फिर रवि से पूछने लगी कि कहा जाना है रवि ने कोई जवाब नहीं दिया, सिर्फ दिया को कार में बैठने का इशारा किया और वह उसे कालेज छोड़ने गया।

दिया कुछ समझ नहीं पा रही थी तो रवि ने दिया को समझाया भले ही हमारी शादी हो गई है पर मैं तुम्हारी पढ़ाई को नहीं छूटने दूगा और न ही तुम्हारे सपने टूटने दूंगा, अब दिया अगर तुम पर घर की जिम्मेदारियां हैं तो तुम्हारे हर सपने को पूरा करने का मेरा दायित्व है।

हम दोनों एक दूसरे को सहयोग देंगे, दिया को रवि की बातें सुनकर राहत महसूस हुई उसके टूटते हुए सपने फिर सजने लगे।

रवि ने हर वक़्त दिया का साथ दिया इसके लिए उसे अपने रिश्तेदारों से भी कई बार आलोचित होना पड़ा पर उसने किसी की परवाह किए बिना हर एक सपना दिया का पूरा किया, रवि घर के कामों में दिया की पढ़ाई में हर तरह मदद करता ।

इस तरह वक़्त बीतता गया अब दिया की पढ़ाई तो पूरी हो गई पर दिया का लेक्चरर बनने के सपने पूरा होने से पहले वह एक सुंदर से बेटे की मां बन गई, बच्चे की जिम्मेदारी मे दिया को अपना केरियर खोता हुआ लगा पर अब भी रवि ने दिया का पूरा साथ दिया, रवि बच्चे, घर सभी को संभालने में दिया की मदद करता तथा समय -समय पर दिया का मनोबल भी बढ़ता।

आज दिया के कालेज का वार्षिकोत्सव, दिया जल्दी से तैयार हो रवि के साथ कालेज गई सब कार्यक्रम होने के बाद अब अंत में सर्वोत्तम लेक्चरर का पुरस्कार घोषित होने वाला था। दिया बेचैन पर रवि संतुष्ट हो, दिया का मनोबल बढ़ाने में लगा कि मंच से दिया का नाम पुरस्कार के लिए घोषित हुआ, पर दिया ने मंच पर जाकर पुरस्कार खुद लेने से इन्कार कर अपने पति रवि को पुरस्कार देने का निवेदन किया, रवि ने मंच पर पहुंच कर दिया से कहा पुरस्कार तुम ही लो यह तुम्हारी दिन रात मेहनत का फल है, पर रवि इस पुरस्कार के असली हकदार तुम ही हो तुम्हारे सहयोग के बिना मैं कुछ नहीं कर सकती थी, तुमने मेरे सपने को पूरा करने के लिए मेरा पूरा सहयोग दिया है। रवि वह पुरस्कार अपने हांथों से दिया को देकर अंततः खुशी महसूस करता है कि आज दिया के सब सपने पूरे हो गए।

रवि के सहयोग से दिया को उसकी मंजिल मिल गई इस तरह ही हर पति को अपनी पत्नी का साथ देकर हर पल उसे सहयोग दे सपने पूरे करने का मौका देना चाहिए। जिस तरह एक पति की कामयाबी में पत्नी का साथ होता है उसी प्रकार अगर पति सहयोग दे तो पत्नी भी कामयाब हो सकती है।

अगर आप मेरे इस लेख से सहमत हैं तो मुझे जरूर बताएं, आप कमेंट या लाइक भी करें, आपका धन्यवाद लेख पढ़ने के लिए

Image Source: boldsky



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